बोराज तालाब हादसे के बाद स्वास्तिक नगर और आसपास की कॉलोनियों में तबाही, मलबे और कीचड़ में घिरे लोग
(हरिप्रसाद शर्मा) सुनील शर्मा।टेलीग्राफ टाइम्स
अजमेर। गुरुवार देर रात हुए बोराज तालाब हादसे ने अजमेर शहर को झकझोर कर रख दिया है। वरुण सागर मार्ग स्थित स्वास्तिक नगर और आसपास की कॉलोनियों में तालाब की पाल टूटने से मची अफरा-तफरी के बाद अब हाल-बेहाल स्थिति बनी हुई है। हादसे में करीब एक हजार घरों को नुकसान पहुंचा है।
तालाब की पाल टूटते ही पानी इतनी तेज़ी से कॉलोनियों में घुसा कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते घरों में पानी भर गया और साथ ही टीवी, फ्रिज, अलमारी, फर्नीचर और अन्य घरेलू सामान नष्ट हो गया। पानी के साथ आया कीचड़ घरों के अंदर तक जम गया, जिससे स्थिति और बदतर हो गई है।

वाहनों और सड़कों को भी भारी नुकसान
सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि कई लोगों के वाहन भी तेज बहाव की चपेट में आ गए। कुछ वाहन पूरी तरह बह गए तो कई गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं, कॉलोनी की सड़कों ने भी पानी के दबाव को नहीं झेला और जगह-जगह धंसाव हो गया। इससे लोगों की आवाजाही में और मुश्किलें बढ़ गई हैं।
प्रशासन और राहत कार्यों पर उठे सवाल
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला, एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं और पूरी रात राहत व बचाव कार्य में जुटी रहीं। हालांकि अब पानी उतरने के बाद कॉलोनी का असली मंजर सामने आया है। चारों ओर कीचड़, गंदगी और मलबा फैला हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल फूड पैकेट और आश्वासन बांटकर चला गया, जबकि असली समस्याएं जस की तस हैं। घरों में कीचड़ जमा है, पीने के पानी और साफ-सफाई की भारी दिक्कत बनी हुई है। जिन परिवारों का सब कुछ बर्बाद हो गया, वे अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
पीड़ितों की मांग – मुआवजा और पुनर्वास
प्रभावित लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल मुआवजे और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह हादसा अप्रत्याशित था जिसने उनकी जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर दिया। लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है और अब हालात से उबरने के लिए सरकारी मदद ही सहारा है।
लापरवाही पर उठे सवाल
यह हादसा एक बार फिर शहर की जल प्रबंधन व्यवस्था और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल खड़ा कर गया है। लोगों का कहना है कि अगर तालाब की पाल की समय पर मरम्मत और निगरानी की गई होती तो यह स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।