बोफोर्स मामला: सुप्रीम कोर्ट ने 2005 के दिल्ली हाईकोर्ट फैसले को चुनौती देने वाली अंतिम याचिका की खारिज

नई दिल्ली/ गौरव कोचर/देश के सबसे चर्चित और चर्चित राजनीतिक विवादों में से एक बोफोर्स तोप सौदा मामले (Bofors Scam) में न्यायपालिका ने अंतिम पटाक्षेप कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा हिंदुजा भाइयों और एबी बोफोर्स (AB Bofors) कंपनी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली अंतिम याचिका को खारिज कर दिया है।

​जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा नेता अजय के. अग्रवाल द्वारा दायर अपील पर आगे सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

​सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां

  • समय और औचित्य पर सवाल: पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से सवाल किया कि जब 2005 में ही दिल्ली हाईकोर्ट कार्यवाहियों को निरस्त कर चुका है और मामले को दशकों बीत चुके हैं, तो अब इस पर आगे विचार करने का क्या औचित्य है?
  • स्थगन की मांग नामंजूर: सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दिवंगत प्रतिवादियों के नाम हटाने हेतु 4 सप्ताह के स्थगन (Adjournment) की मांग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि 2018 से लंबित इस मामले को अब और टालने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।

क्या था 2005 का दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला?

​31 मई 2005 को दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश आर.एस. सोढ़ी ने हिंदुजा भाइयों (श्रीचंद, गोपीचंद और प्रकाश हिंदुजा) तथा एबी बोफोर्स कंपनी को सभी आपराधिक आरोपों से मुक्त कर दिया था।

हाईकोर्ट का मुख्य निष्कर्ष: सीबीआई द्वारा प्रस्तुत स्वीडिश दस्तावेजों की प्रामाणिकता और साक्ष्यों की विश्वसनीयता में गंभीर खामियां पाई गईं। अदालत ने माना था कि आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ अवैध दलाली या रिश्वतखोरी का कोई सीधा लिंक स्थापित नहीं किया जा सका।

बोफोर्स मामले का घटनाक्रम और इतिहास

वर्ष

प्रमुख घटना

मार्च 1986

भारत सरकार और स्वीडिश रक्षा कंपनी एबी बोफोर्स के बीच ₹1,437 करोड़ का 400 हॉवित्जर तोपों का समझौता।

अप्रैल 1987

स्वीडिश रेडियो ने भारतीय नेताओं और रक्षा अधिकारियों को दलाली/कमीशन दिए जाने का दावा किया।

जनवरी 1990

सीबीआई ने आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पहली FIR दर्ज की।

फरवरी 2004

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस जे.डी. कपूर ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी को मामले में दोषमुक्त किया।

मई 2005

दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंदुजा बंधुओं और बोफोर्स कंपनी के खिलाफ सभी आरोप निरस्त किए।

नवंबर 2018

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई द्वारा 4,500 से अधिक दिनों की देरी से दायर अपील को खारिज कर दिया था।

अगस्त 2026

सुप्रीम कोर्ट ने निजी याचिका को खारिज कर मामले में अंतिम कानूनी मुहर लगा दी।

​न्यायिक प्रक्रिया का अंतिम समापन

​उल्लेखनीय है कि सीबीआई की ओर से दायर देरी वाली याचिका को शीर्ष अदालत पहले ही खारिज कर चुकी थी। अब निजी याचिका के भी खारिज होने के साथ ही लगभग चार दशकों से चल रहे इस बहुचर्चित कानूनी विवाद के सभी रास्ते पूरी तरह बंद हो गए हैं।

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