पुण्यतिथि विशेष: 14 जुलाई 2026 को स्वर्गीय हरिहर प्रसाद जी की 7वीं पुण्यतिथि सादगी और सेवा भाव से मनाई गई।
- सराहनीय पहल: डीएवी शिक्षिका जयश्री आनंद ने पिता की स्मृति में जरूरतमंदों को बांटी सामग्री और कराया भोजन।
- प्रेरणा: बेटियों के उत्तरदायित्व और समाजसेवा का संदेश देती एक भावुक पहल।
छाल/ बुधराम अग्रवाल
“बेटियाँ सिर्फ आँगन की रौनक ही नहीं, बल्कि माता-पिता के संस्कारों और उनकी विरासत को जीवित रखने वाला वो मजबूत स्तंभ भी हैं, जो बेटों से किसी भी मायने में कम नहीं हैं।” इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है क्षेत्र की प्रतिष्ठित डीएवी शिक्षिका जयश्री आनंद ने। उन्होंने अपने पूज्य पिता स्वर्गीय हरिहर प्रसाद जी की 7वीं पुण्यतिथि (14 जुलाई 2026) के अवसर पर किसी तरह के तड़क-भड़क वाले आयोजन के बजाय, समाजसेवा को चुनकर अपने पिता को एक सच्ची और अनूठी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान आयोजित विभिन्न सेवा कार्यों की पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।
जरूरतमंदों की सेवा कर दिया मानव सेवा का संदेश
स्वर्गीय हरिहर प्रसाद जी की पुण्य स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों की मदद करना था। कार्यक्रम के तहत जयश्री आनंद द्वारा कई परोपकारी कार्य किए गए:
- बच्चों की मदद: आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुसार पठन-सामग्री व अन्य जरूरी सामान का वितरण किया गया।
- महिलाओं का सम्मान: गरीब और असहाय महिलाओं को सम्मानपूर्वक साड़ियाँ भेंट की गईं, ताकि इस मानसूनी मौसम में उन्हें राहत मिल सके।
- अन्नदान: गरीब, बेसहारा और असहाय लोगों को आदर सहित भरपेट भोजन कराया गया। जयश्री आनंद ने स्वयं इस सेवा कार्य में हिस्सा लेकर मानव सेवा ही माधव सेवा है, का संदेश दिया।
“पिता का साया उठने पर होती है दुनिया की पहचान”
इस मौके पर अपने पिता को याद करते हुए जयश्री आनंद अत्यंत भावुक हो उठीं। उन्होंने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा:
“जब पिता का साया सिर से उठ जाता है, तब जीवन की वास्तविकताओं और दुनिया की असली पहचान होती है। पिता ही परिवार की ढाल होते हैं। आज वो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके दिए संस्कार हमेशा हमारे साथ हैं। माता-पिता की स्मृति में समाज के काम आना और दीन-दुखियों की सेवा करना ही एक संतान की तरफ से उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।”
ग्रामीणों और प्रबुद्ध जनों ने की सराहना
स्वर्गीय हरिहर प्रसाद जी की पुण्यतिथि पर आयोजित इन सेवा कार्यों को देखकर उपस्थित ग्रामीणों और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने जयश्री आनंद के इस कदम की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय हरिहर प्रसाद जी के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि दी और कहा कि समाज को आज ऐसी ही जागरूक और संस्कारी बेटियों की जरूरत है, जो रूढ़िवादिता को तोड़कर पितातुल्य संस्कारों को आगे बढ़ा रही हैं।