बीजेपी का बड़ा दांव : जगदीप धनखड़ से सीपी राधाकृष्णन तक, 180 डिग्री का राजनीतिक मोड़

बीजेपी का बड़ा दांव : जगदीप धनखड़ से सीपी राधाकृष्णन तक, 180 डिग्री का राजनीतिक मोड़

रिपोर्ट: टेलीग्राफ टाइम्स / अवधेश बामल/नई दिल्ली 
Edited  By : गौरव कोचर 
टेलीग्राफ टाइम्स
अगस्त 18,2025

नई दिल्ली।
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उपराष्ट्रपति पद के लिए नया उम्मीदवार तय कर दिया है। एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन के नाम का ऐलान किया है। यह फैसला मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के कुछ ही हफ्तों बाद सामने आया है। माना जा रहा है कि यह बदलाव न केवल पार्टी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, बल्कि दक्षिण भारत में बीजेपी के विस्तार और ओबीसी राजनीति को साधने की कोशिश भी है।

सीपी राधाकृष्णन : रणनीतिक और समावेशी चेहरा

राधाकृष्णन लंबे समय से संघ और जनसंघ की विचारधारा से जुड़े रहे हैं। उन्हें दक्षिण भारत का प्रतिनिधि और संगठनात्मक रूप से मजबूत नेता माना जाता है।

  • वे ओबीसी वर्ग से आते हैं, जो बीजेपी की सामाजिक समीकरण साधने की कोशिशों को दर्शाता है।
  • उनका राजनीतिक अंदाज़ समावेशी और संतुलित माना जाता है।
  • विपक्ष की आलोचनाओं से घिरे धनखड़ के विपरीत राधाकृष्णन को एक “मध्यम और शांत” व्यक्तित्व के रूप में देखा जा रहा है।

धनखड़ बनाम राधाकृष्णन : दो अलग पहचान

जगदीप धनखड़ को 2022 में जाट आंदोलन की पृष्ठभूमि में उपराष्ट्रपति बनाया गया था। उस समय पार्टी ने जाट समुदाय को यह संदेश दिया कि वे राष्ट्रीय सत्ता संरचना का हिस्सा हैं।

  • धनखड़ को विपक्ष हमेशा एक विवादित और हस्तक्षेपकारी नेता मानता रहा।
  • उनकी कार्यशैली को कई बार निष्पक्षता से हटकर देखा गया।

इसके उलट राधाकृष्णन को एक रणनीतिक और संस्थागत अनुभव वाले नेता के रूप में पेश किया जा रहा है, जिनकी छवि विवादों से दूर रही है।

राजनीतिक संदेश

बीजेपी ने राधाकृष्णन को आगे कर कई संकेत देने की कोशिश की है—

  1. दक्षिण भारत में विस्तार : तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों में जहां बीजेपी अभी तक मजबूत उपस्थिति नहीं बना सकी है, वहां यह नियुक्ति असर डाल सकती है।
  2. ओबीसी राजनीति : ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व कर राधाकृष्णन, बीजेपी की सामाजिक इंजीनियरिंग रणनीति को मज़बूत करेंगे।
  3. विपक्ष से टकराव के बजाय संवाद : हाल ही में राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से मुलाकात कर डीएमके की आलोचनाओं का जवाब संवाद के ज़रिये देने का संदेश दिया।
  4. सनातन धर्म विवाद पर रुख : उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणियों को उन्होंने सधे शब्दों में खारिज किया और उन्हें “बच्चा” कहकर टाल दिया।

महाराष्ट्र में भी सक्रिय भूमिका

सीपी राधाकृष्णन ने महाराष्ट्र की राजनीति में भी हस्तक्षेप किया है। विपक्ष ने उनसे विवादित पब्लिक सिक्योरिटी बिल पर हस्ताक्षर न करने की गुज़ारिश की। हालांकि उनका हस्तक्षेप सीमित और संस्थागत रहा, जबकि धनखड़ अपने कार्यकाल में बार-बार टकराव की स्थिति पैदा कर देते थे।

सीपी राधाकृष्णन का नाम बीजेपी के लिए केवल उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी नहीं है, बल्कि यह पार्टी की भविष्य की राजनीति का रोडमैप है। जहां एक ओर धनखड़ की पहचान जाट आंदोलन और विवादित बयानों से जुड़ी रही, वहीं राधाकृष्णन की उम्मीदवारी एक समावेशी, वैचारिक और रणनीतिक राजनीति की ओर इशारा करती है।

 

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