भागलपुर, बिहार!/ लोकेंद्र सिंह शेखावत /15 अप्रैल 2026 को सम्राट चौधरी जी ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। क्या उनका यह कार्यकाल इतिहास बदलेगा या पुराना ढर्रा दोहराएगा? अस्थिर मिथुन लग्न का प्रभाव: शपथ ग्रहण के समय मिथुन लग्न (द्वि-स्वभाव लग्न) उदित था। ज्योतिष के अनुसार द्वि-स्वभाव लग्न सरकार में भारी अनिश्चितता, बड़े यू-टर्न और अचानक नेतृत्व परिवर्तन का संकेत देता है।
अल्पकालिक इतिहास की चुनौती:- सम्राट चौधरी जी का राजनीतिक इतिहास गवाह है कि उन्होंने कभी भी मंत्री पद पर 5 वर्षों का कार्यकाल पूरा नहीं किया। यहाँ तक कि बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी उनका कार्यकाल अल्पकालिक रहा। यह ‘व्यक्तिगत इतिहास’ और ‘शपथ लग्न’ का संयोग सत्ता में लंबे ठहराव की गवाही नहीं देता।
2026-2027 के मध्य बड़ा उलटफेर? राजनीतिक समीक्षकों और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वर्ष 2026 से 2027 के मध्य का समय सम्राट चौधरी के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है। इस अवधि में ग्रहों का गोचर और आंतरिक राजनीतिक खींचतान इतनी तीव्र हो सकती है कि उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है।
मिथुन लग्न की चंचलता और पुराना इतिहास इस बात की प्रबल आशंका जताते हैं कि सम्राट सरकार का यह सफर बेहद संक्षिप्त और अप्रत्याशित मोड़ों से भरा होगा। ज्योतिष विद्या के आलोक में यह परिलक्षित हो रहा है कि दिसंबर 2026 तक बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कुर्सी जा सकती है।
नारायण! जय हो महामाया।