बिलासपुर की शिविका पांडेय ने चोट को मात देकर जीता राज्य स्तरीय स्केटिंग खिताब

गनपत चौहान 

रायपुर • 12 मई 2026

​रायपुर के सरोना स्थित निजी पब्लिक स्कूल के स्केटिंग ग्राउंड में आयोजित प्रथम छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय रोलर स्पोर्ट्स रैंकिंग चैंपियनशिप में बिलासपुर की शिविका पांडेय ने अपनी प्रतिभा और अदम्य साहस का परिचय देते हुए राज्य स्तरीय चैंपियन का खिताब अपने नाम किया है। 9 और 10 मई को आयोजित इस प्रतियोगिता में शिविका ने शारीरिक कष्ट के बावजूद हार न मानने वाले जज्बे का प्रदर्शन किया।

चोट के बावजूद कायम रखा जीत का जज्बा

​शिविका ने 10 से 12 वर्ष आयु वर्ग की ट्वॉय इनलाइन स्केट स्पर्धा में भाग लिया। उनकी जीत की कहानी संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति से भरी रही:

  • 9 मई (400 मीटर रेस): प्रतियोगिता के पहले दिन शिविका दौड़ के दौरान गंभीर रूप से चोटिल हो गईं। असहनीय दर्द के बावजूद उन्होंने रेस नहीं छोड़ी और घायल अवस्था में ही मुकाबला पूरा कर कांस्य पदक हासिल किया।
  • 10 मई (200 मीटर रेस): अगले ही दिन, चोट के कारण होने वाले दर्द को नजरअंदाज करते हुए शिविका मैदान में उतरीं। उन्होंने अपनी गति और संतुलन से प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।

​इन दोनों पदकों के आधार पर उन्हें अपने आयु वर्ग की ओवरऑल चैंपियन घोषित किया गया।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और प्रेरणा

​शिविका पांडेय बिलासपुर के बिरला ओपन माइंड्स इंटरनेशनल स्कूल में छठवीं कक्षा की छात्रा हैं। वे रॉयल स्केटिंग क्लब, बिलासपुर में नियमित रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उनकी इस उपलब्धि से खेल जगत और उनके परिवार में हर्ष का माहौल है।

​शिविका के माता-पिता चिकित्सा क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

    • माता: डॉ. श्वेता पांडेय (आयुर्वेद चिकित्साधिकारी)।
    • पिता: डॉ. विद्या भूषण पांडेय (विभागाध्यक्ष – बालरोग विभाग, शासकीय आयुर्वेद चिकित्सालय महाविद्यालय, बिलासपुर)।

विशेष तथ्य: शिविका की शारीरिक क्षमता और रोग प्रतिरोधक शक्ति का श्रेय उनके परिवार ने ‘स्वर्ण प्राशन’ (आयुर्वेदिक इम्युनिटी बूस्टर) को दिया है। उनके पिता डॉ. विद्या भूषण पांडेय स्वयं नियमित रूप से स्वर्ण प्राशन शिविरों के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य संवर्धन के लिए कार्य कर रहे हैं।

 

​शिविका की यह सफलता न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा भी है जो विपरीत परिस्थितियों में हार मान लेते हैं।

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