बिलासपुर की कला-संस्कृति की पहचान थे मनीष दत्त: आचार्य ए.डी.एन. बाजपेयी

गनपत चौहान 

काव्य भारती द्वारा मनीष दा की 86वीं जयंती पर ‘एक शाम मनीष दा के गीतों और यादों के नाम’ का भव्य आयोजन

बिलासपुर। स्थानीय प्रार्थना सभा भवन में ‘काव्य भारती कला एवं संगीत मंडल’ द्वारा विख्यात रंगकर्मी और संगीत साधक स्व. मनीष दत्त की 86वीं जयंती के अवसर पर एक आत्मीय संध्या का आयोजन किया गया। ‘एक शाम मनीष दा के गीतों और यादों के नाम’ शीर्षक वाले इस कार्यक्रम में मनीष दत्त द्वारा संगीतबद्ध गीतों की मधुर प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मनीष दा का योगदान अतुलनीय: पूर्व कुलपति

​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अटल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आचार्य ए.डी.एन. बाजपेयी ने मनीष दत्त को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कला जगत में उनका योगदान अद्वितीय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी शहर की असली पहचान उसकी कला और संस्कृति से होती है, और मनीष दत्त एक ऐसी विभूति थे जिनके नाम से बिलासपुर का कला जगत पूरे देश में विख्यात रहा। उन्होंने संस्था के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश बाजपेयी के कार्यों की सराहना करते हुए डॉ. सुप्रिया और डॉ. रत्ना मिश्रा के समर्पण को भी सराहा।

ढाई हजार कविताओं को किया संगीतबद्ध

​संस्था के संरक्षक और छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक ने बताया कि मनीष दत्त की साधना कितनी गहरी थी कि उन्होंने लगभग 2500 कविताओं को स्वर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि कवियों की संवेदना को स्वरलिपि के माध्यम से संगीत में ढालना ही काव्य भारती की सबसे बड़ी विशेषता है।

54 वर्षों की अटूट परंपरा

​अध्यक्ष चंद्र प्रकाश बाजपेयी ने बताया कि काव्य भारती पिछले 54 वर्षों से कला, संगीत और अभिनय के क्षेत्र में यह आयोजन निरंतर कर रही है। वहीं डॉ. विजय सिन्हा ने कहा कि यह कार्यक्रम बिलासपुर के पुराने सांस्कृतिक गौरव को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

सांस्कृतिक संध्या की झलकियां

​कार्यक्रम की शुरुआत मनीष दा के चित्र पर माल्यार्पण और उनके प्रिय फल ‘तरबूज’ को काटकर की गई। इसके बाद मंच पर कला का अद्भुत संगम देखने को मिला:

  • गायन एवं अभिनय: कलाकारों ने महादेवी वर्मा, निराला, बच्चन, नीरज, जयदेव और मीरा जैसे महान कवियों की रचनाओं को स्वर दिया। प्रमुख गीतों में ‘हाथ वीणा’, ‘मधु रितु’, ‘चंदन है तो महकेगा ही’, ‘हमन है इश्क’ और ‘वीर जवानों को समर्पित: वीरों का कैसा हो वसंत’ ने समां बांध दिया।
  • प्रमुख कलाकार: डॉ. सुप्रिया भारतीयन, डॉ. रत्ना मिश्रा, डॉ. किरण बाजपेयी, एस. भारतीयन, रीना पाल, दीप्ति मेहता सहित नन्हें कलाकार अद्वैत, कान्हा और शौर्य ने अपनी प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया।
  • नृत्य प्रस्तुति: पूर्वी यादव, पल्लवी यादव, सृष्टि और प्रशस्ति शर्मा ने काव्य-नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी।

सम्मान और उपस्थिति

​इस अवसर पर मातृ दिवस का भी सम्मान किया गया। संरक्षक डॉ. उषा किरण बाजपेयी ने उपस्थित नारी शक्ति को अंग वस्त्र भेंट किए, वहीं चंद्र प्रकाश बाजपेयी ने कलाकारों को पुरस्कृत किया।

​कार्यक्रम में नगर के प्रबुद्ध जन और कला प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिनमें सतीश जायसवाल, डॉ. मंत राम यादव, डॉ. आर.के. शर्मा, डॉ. जी.बी. सिंह और राजीव नयन शर्मा प्रमुख थे। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. सुप्रिया भारतीयन ने किया एवं आभार प्रदर्शन अखिलेश बाजपेयी द्वारा किया गया। आयोजन के अंत में सभी ने पारंपरिक ‘आम के पना’ का आनंद लिया।

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