सुनील शर्मा
जयपुर, 20 जून। जयपुर डिस्कॉम ने ग्रिड सुरक्षा और बिजली बचत की दिशा में एक अनूठी और आधुनिक शुरूआत की है। डिस्कॉम ने प्रौद्योगिकी कंपनी फ्लॉक एनर्जी के सहयोग से जयपुर में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के एयर कंडीशनर (एसी) पर निःशुल्क स्मार्ट आईओटी (IoT) डिवाइस लगाने का प्रोजेक्ट शुरू किया है।
फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में वैशाली नगर, मानसरोवर और मालवीय नगर में शुरू किया गया है, जहां करीब 2 हजार विद्युत उपभोक्ताओं के घरों में यह स्मार्ट डिवाइस लगाई जा रही हैं।
देश की पहली ऑटोमेटेड डिमांड रिस्पांस (ADR) परियोजना
यह देश में किसी भी बिजली वितरण निगम द्वारा पीक ऑवर्स (बिजली की सबसे ज्यादा मांग वाले समय) के दौरान घरेलू क्षेत्र की विद्युत खपत को ऑटोमेटेड डिमांड रिस्पांस (ADR) तकनीक से नियंत्रित करने की पहली परियोजना है।
इस तकनीक की मदद से पीक ऑवर्स में अत्यधिक बिजली की खपत करने वाले उपकरणों, विशेष रूप से एयर कंडीशनरों को स्वचालित रूप से कंट्रोल किया जा सकेगा। इससे ग्रिड और पूरे विद्युत तंत्र पर पड़ने वाला दबाव कम होगा, साथ ही उपभोक्ताओं के बिजली के बिल में भी अच्छी खासी कमी आएगी। यह पायलट प्रोजेक्ट राजस्थान विद्युत नियामक प्राधिकरण के ‘डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी एवं डिमांड साइड मैनेजमेंट विनियम-2026’ के तहत प्रारंभ किया गया है।
जानिए कैसे काम करेगी यह स्मार्ट आईओटी डिवाइस
यह एडीआर (ADR) डिवाइस मुख्य रूप से दो भागों से मिलकर बनी है:
- स्मार्ट प्लग यूनिट: इसे घर के किसी भी सामान्य विद्युत सॉकेट में लगाया जाता है।
- सेंसर यूनिट: इस दूसरी यूनिट को सीधे एयर कंडीशनर पर चिपकाया जाता है।
यह पूरी डिवाइस घर के वाई-फाई नेटवर्क के माध्यम से ग्रिड प्रबंधन प्रणाली (Grid Management System) से जुड़ी रहती है। जब भी ग्रिड पर बिजली की मांग अपने उच्चतम स्तर (Peak) पर पहुंचती है, तो यह सेंसर डिवाइस कमरे के अनुकूल तापमान को बनाए रखते हुए एसी के तापमान में अपने आप 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि कर देती है। अगर एसी प्रतिदिन 6 से 8 घंटे चलाया जाए, तो इस तकनीक से बिजली की खपत में 3 से 6 प्रतिशत तक की कमी आती है।
बिजली की खपत में आएगी 1 मेगावाट तक की कमी
जयपुर डिस्कॉम प्रबंधन का अनुमान है कि शुरुआती चरण में करीब 2,000 उपभोक्ताओं के एसी को इस एडीआर तकनीक से जोड़ने पर बिजली की कुल मांग में 1 मेगावाट तक की कमी लाई जा सकेगी।
उपभोक्ताओं और ग्रिड को होने वाले मुख्य लाभ:
- बिजली बिल में राहत: उपभोक्ताओं के कुल विद्युत उपभोग में करीब 6 प्रतिशत तक की सीधी बचत होगी।
- ओवरलोडिंग से सुरक्षा: ग्रिड को ओवरलोड होने से बचाया जा सकेगा, जिससे तकनीकी फॉल्ट होने की आशंका बेहद कम हो जाएगी।
- बेहतर पावर सप्लाई: फॉल्ट और ट्रिपिंग कम होने से उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के सही वोल्टेज की बिजली मिल सकेगी।