बस्सी के महात्मा गांधी विद्यालय के विद्यार्थियों ने किया SKIT का शैक्षणिक भ्रमण: आधुनिक तकनीक और कौशल से हुए रूबरू

बस्सी के महात्मा गांधी विद्यालय के विद्यार्थियों ने किया SKIT का शैक्षणिक भ्रमण: आधुनिक तकनीक और कौशल से हुए रूबरू

| योगेश शर्मा

जयपुर। विद्यार्थियों में तकनीकी समझ विकसित करने और उन्हें भविष्य की संभावनाओं से अवगत कराने के उद्देश्य से, महात्मा गांधी विद्यालय, बस्सी के छात्र-छात्राओं ने जयपुर स्थित स्वामी केशव आनंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (SKIT) का शैक्षणिक भ्रमण किया। ‘उन्नत भारत अभियान’ (UBA) के अंतर्गत आयोजित इस विजिट में विद्यालय के कक्षा 9वीं और 10वीं के 80 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

फ़ोटो टेलीग्राफ टाइम्स

तकनीकी बारीकियों और नवाचार का अनुभव

​भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को SKIT कैंपस के विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों का दौरा कराया गया। फैकल्टी मेंबर्स ने बच्चों को निम्नलिखित मुख्य केंद्रों का अवलोकन करवाया:

  • सिविल ब्लॉक: यहाँ छात्रों को निर्माण की बारीकियों और इंजीनियरिंग के बुनियादी सिद्धांतों को समझाया गया।
  • आईटी लैब्स: कंप्यूटर विज्ञान की दुनिया और कोडिंग के महत्व पर चर्चा की गई।
  • इनक्यूबेशन सेल: बच्चों को स्टार्टअप कल्चर और नए आइडियाज को हकीकत में बदलने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया।
  • लाइब्रेरी एवं अन्य संसाधन: छात्रों ने संस्थान की विशाल लाइब्रेरी और अत्याधुनिक संसाधनों को देखा।

​विशेष बात यह रही कि केवल थ्योरी ही नहीं, बल्कि बच्चों को कई उपकरणों पर प्रैक्टिकल भी करवाया गया, जिससे उनकी जिज्ञासा और सीखने की ललक बढ़ गई।

इन दिग्गजों के निर्देशन में सफल हुआ आयोजन

​इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक विजिट का आयोजन और मार्गदर्शन संस्थान के वरिष्ठ विशेषज्ञों द्वारा किया गया, जिनमें शामिल रहे:

  • प्रोफेसर मेहुल महर्षि (विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर विज्ञान विभाग)
  • डॉ. किरण राठी (UBA कोऑर्डिनेटर)
  • प्रोफेसर बी.एल. शर्मा (विभागाध्यक्ष, सिविल इंजीनियरिंग विभाग)

​कार्यक्रम को सफल बनाने में नवीन जैन, दिनेश कुमार, अवधेश शर्मा, सीताराम सैनी और लीना नरूला का विशेष सहयोग रहा।

कौशल आधारित शिक्षा की ओर बढ़ते कदम

​उन्नत भारत अभियान के तहत किए गए इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा (Skill-based Education) के प्रति प्रेरित करना था। भ्रमण के अंत में बच्चों के चेहरों पर नई सीख की चमक साफ देखी जा सकती थी। शिक्षकों के अनुसार, इस तरह के दौरों से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में तकनीकी शिक्षा के प्रति आत्मविश्वास पैदा होता है।

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