प्रीति बालानी
नई दिल्ली | 20 अप्रैल 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बसव जयंती के पावन अवसर पर 12वीं सदी के महान समाज सुधारक और दार्शनिक जगद्गुरु बसवेश्वर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर बसवेश्वर के अमर उपदेशों को याद करते हुए समाज के प्रति उनके योगदान को रेखांकित किया।
न्याय और सशक्तिकरण का संदेश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि जगद्गुरु बसवेश्वर का एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज का दृष्टिकोण आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने लिखा:
”बसव जयंती के विशेष अवसर पर जगद्गुरु बसवेश्वर तथा उनके अमर उपदेशों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनका न्यायपूर्ण समाज का विजन और लोगों को सशक्त बनाने के उनके अटूट प्रयास हमें सदैव प्रेरित करते रहेंगे।”
बसवेश्वर के विजन की प्रासंगिकता
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि जगद्गुरु बसवेश्वर ने न केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन दिया, बल्कि एक ऐसे समाज की नींव रखी जहाँ समानता और मानवीय गरिमा सर्वोपरि थी। उनके द्वारा स्थापित ‘अनुभव मंतपा’ को विश्व के पहले लोकतांत्रिक संसदों में से एक माना जाता है, जिसने जाति और लैंगिक भेदभाव से ऊपर उठकर संवाद को बढ़ावा दिया।
मुख्य बिंदु:
- सामाजिक समरसता: प्रधानमंत्री ने बसवेश्वर के उन प्रयासों की सराहना की जो समाज के वंचित वर्गों को सशक्त बनाने के लिए किए गए थे।
- अमर उपदेश: बसवेश्वर के ‘वचन’ और उनके सिद्धांत (जैसे ‘कायकवे कैलास’ – कार्य ही पूजा है) आज भी आधुनिक भारत के विकास और सेवा भाव के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
- लोकतांत्रिक मूल्य: उनके विचार भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं।