जयपुर /योगेश शर्मा/ राजधानी के डिग्गी-मालपुरा रोड स्थित रातल्या गांव के बाशिंदे इन दिनों नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। गांव की आबादी भूमि और सरकारी विद्यालय के ठीक पास बने सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) की मुख्य पाइपलाइन पिछले 12 दिनों से टूटी हुई है। इससे निकल रहे अत्यधिक गंदे और बदबूदार पानी ने पूरे गांव को बदबू के दरिया में तब्दील कर दिया है। बार-बार प्रशासनिक चक्कर काटने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। हालात से नाराज ग्रामीणों ने अनोखे अंदाज में ढोल बजाकर उग्र विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन व राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया।
गलियों में बह रहा दूषित पानी, 45 परिवारों पर मंडराया बीमारियों का खतरा
स्थानीय निवासी दिनेश बागड़ा ने बताया कि प्लांट से लगातार बह रहे केमिकल युक्त और दूषित पानी के कारण गांव की गलियां, मुख्य रास्ते और आसपास के खुले क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। इस दूषित पानी से पूरे इलाके में भयंकर दुर्गंध फैल गई है, जिसके चलते लोगों का घरों से निकलना और सांस लेना तक दूषित हो गया है। सबसे ज्यादा प्रभावित आबादी क्षेत्र में रह रहे 45 परिवार हैं, जिनके सामने अब गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी स्कूल के पास गंदा पानी जमा होने से बच्चों की पढ़ाई और सेहत दोनों पर सीधा असर पड़ रहा है। मच्छरों का प्रकोप इतनी तेजी से बढ़ा है कि इलाके में मलेरिया, डेंगू और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा चौबीसों घंटे मंडरा रहा है।
अनोखा प्रदर्शन: सोए हुए प्रशासन को जगाने के लिए बजाया ‘ढोल’
जिम्मेदार विभागों की कुंभकर्णी नींद को तोड़ने के लिए ग्रामीणों ने विरोध का एक अनोखा तरीका अपनाया। ग्रामीण हाथों में तख्तियां लेकर ढोल की थाप के साथ सड़कों पर उतरे। ढोल बजाते हुए पूरे गांव में जुलूस निकाला गया और जोरदार नारेबाजी कर प्रशासन के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया गया।
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि स्वच्छ वातावरण में जीना उनका संवैधानिक अधिकार है, जिसे वे किसी भी बिल्डर, एजेंसी या प्रशासनिक लापरवाही की भेंट नहीं चढ़ने देंगे। कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें देने के बावजूद अब तक धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे ग्रामीणों में व्यवस्था के खिलाफ भारी गुस्सा है।
उग्र आंदोलन और चक्का जाम की दी चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और जिला प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि समय रहते एसटीपी प्लांट से निकलने वाले दूषित पानी को तुरंत नहीं रोका गया और टूटी पाइपलाइन का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो यह विरोध एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले लेगा। आने वाले दिनों में डिग्गी-मालपुरा रोड पर चक्का जाम कर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें:
- एसटीपी/सीईटीपी प्लांट की तत्काल उच्च स्तरीय जांच की जाए।
- प्रदूषण फैलाने और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
- टूटी पाइपलाइन को तुरंत दुरुस्त कर गांव को इस बदबूदार पानी से स्थायी रूप से निजात दिलाई जाए।
प्रदर्शन में भारी संख्या में मातृशक्ति रही मौजूद
इस व्यापक विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और विशेषकर महिलाएं मौजूद रहीं। गांव के प्रमुख जागरूक नागरिकों में दिनेश बागड़ा, अर्जुन राणा, कृष्ण मेहता, कान्ता देवी, पूजा देवी और घासीराम राणा सहित सैकड़ों महिलाओं व पुरुषों ने एक सुर में प्रशासन को चेतावनी दी कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।