गौरव कोचर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया धमाका
नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने अपने इस्तीफे का एलान किया। उन्होंने बेहद भावुक लेकिन कड़े शब्दों में कहा:
”मैंने अपनी जवानी के 15 साल और अपना खून-पसीना इस पार्टी को सींचने में लगा दिया। लेकिन आज यह पार्टी अपने सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से पूरी तरह भटक चुकी है। अब यह देशहित के लिए नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए काम कर रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि वह काफी समय से महसूस कर रहे थे कि वह “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” (Right man in the wrong party) हैं।
दो-तिहाई सांसदों के साथ बगावत
राघव चड्ढा ने दावा किया कि उनके साथ राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सांसद भी बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए बताया कि वे राज्यसभा में ‘आप’ के विधायी दल का विलय बीजेपी में करेंगे।
बीजेपी में शामिल होने वाले अन्य प्रमुख चेहरे:
- संदीप पाठक (संगठन महासचिव)
- अशोक मित्तल
- हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)
- स्वाति मालीवाल
- राजिंदर गुप्ता
- विक्रम साहनी
इस्तीफे की मुख्य वजहें
- पार्टी में दरकिनार किया जाना: हाल ही में राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के ‘उप-नेता’ के पद से हटा दिया गया था, जिससे उनके और नेतृत्व के बीच दूरियां बढ़ गई थीं।
- सिद्धांतों से भटकाव: चड्ढा ने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर उनकी आवाज दबाई जा रही थी और उन्हें संसद में जनहित के मुद्दे उठाने से रोका जा रहा था।
- पीएम मोदी के नेतृत्व पर भरोसा: उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की प्रशंसा की और कहा कि वे देश के विकास के लिए उनके साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।
आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया
आम आदमी पार्टी ने इस कदम को ‘विश्वासघात’ करार दिया है। पार्टी नेता संजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि बीजेपी का “ऑपरेशन लोटस” कामयाब हो गया है। उन्होंने कहा, “जनता उन सात सांसदों को कभी माफ नहीं करेगी जो पार्टी और जनता के भरोसे को छोड़कर गए हैं।”
भविष्य की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा को केंद्र सरकार में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी या मंत्री पद दिया जा सकता है। यह दलबदल आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों और दिल्ली की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।
: राघव चड्ढा का जाना अरविंद केजरीवाल के लिए अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती साबित हो सकता है, क्योंकि चड्ढा पार्टी के चेहरे और चाणक्य, दोनों माने जाते थे।
क्या आपको लगता है कि राघव चड्ढा के इस फैसले से दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी के आधार पर कोई बड़ा असर पड़ेगा?