बचपन में ब्याही गई भंवरी, अब प्रेमी संग लिव-इन में… ससुराल से मिल रही धमकियों पर पहुंची पुलिस के पास

📰 बचपन में ब्याही गई भंवरी, अब प्रेमी संग लिव-इन में… ससुराल से मिल रही धमकियों पर पहुंची पुलिस के पास

By : गौरव कोचर 
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 15,2025

चूरू (राजस्थान)।
यह कहानी है चूरू जिले की एक ऐसी लड़की की, जिसे बचपन में अपनी मर्जी के बिना ब्याह दिया गया। महज 11 साल की उम्र में जब उसे शादी का मतलब भी ठीक से समझ नहीं आता था, तभी उसे ससुराल भेज दिया गया। शादी के कुछ सालों में वह दो बच्चों की मां बन गई, लेकिन पति का साथ और प्यार उसे कभी नहीं मिला। पति विदेश में रहता था और उसकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं – पत्नी नहीं, परिवार।

नई उम्मीद, नया रिश्ता
इसी अकेलेपन और उपेक्षा के बीच भंवरी की जिंदगी में आया एक नया मोड़ – जांदवा गांव का 24 वर्षीय बाबूलाल। तीन साल पहले दोनों की पहचान हुई, जो धीरे-धीरे नजदीकियों में बदली। बाबूलाल से मिले सहारे और स्नेह ने भंवरी के दिल में नई उम्मीद जगा दी। आखिरकार उसने अपने तीन साल के बेटे के साथ बाबूलाल के साथ लिव-इन में रहने का फैसला कर लिया।

धमकियों से परेशान, मांगी पुलिस से सुरक्षा
अब 22 साल की हो चुकी भंवरी फिलहाल रतनगढ़ तहसील के गौरीसर गांव में अपने मायके से निकलकर बाबूलाल के साथ रह रही है। उसने चूरू पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सुरक्षा की मांग करते हुए बताया कि उसका ससुराल जुहारपुरा गांव में है। वहीं से उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं। भंवरी के अनुसार उसका पति अब विदेश से लौट आया है, लेकिन वह अब किसी भी हाल में वापस ससुराल नहीं जाना चाहती।

दिल्ली तक का सफर और लिव-इन दस्तावेज
भंवरी ने बताया कि 3 जुलाई को वह अपने बेटे के साथ घर से निकली और बाबूलाल के साथ दिल्ली चली गई, जहां दोनों ने एक धर्मशाला में कुछ दिन गुजारे। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई। इसके बाद दोनों वापस रतनगढ़ लौटे और लिव-इन रिलेशनशिप के दस्तावेज तैयार करवाकर सुरक्षा के लिए पुलिस के पास पहुंचे।

भंवरी की गुहार – ‘मैं बस शांति से जीना चाहती हूं’
भंवरी का साफ कहना है कि वह अब शांति से जीना चाहती है। पति के साथ रिश्ते में अब कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं बचा और ससुरालवालों की धमकियों ने उसकी स्थिति और मुश्किल कर दी है।


🔍 सवाल उठते हैं –

  • क्या बाल विवाह की इस पीड़ा से भंवरी जैसी कई लड़कियां अब भी गुजर रही हैं?
  • क्या लिव-इन जैसे वैकल्पिक संबंधों को समाज सहजता से स्वीकार कर पाएगा?
  • और क्या भंवरी जैसी महिलाओं को उनका हक और सुरक्षा मिल पाएगी?

यह मामला सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि समाज की उन परतों को उजागर करता है जहां अब भी परंपरा के नाम पर कई जिंदगियां कुर्बान हो जाती हैं।


 

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