महाराष्ट्र
बकरियां चराते हुए लिखी सफलता की कहानी: बिरदेव सिद्धप्पा डोणे बने IPS अधिकारी
Written By: प्राची चतुर्वेदी/ महाराष्ट्र
Edited By: सुनील शर्मा
टेलीग्राफ टाइम्स
अप्रैल 27, 2025
कोल्हापुर (महाराष्ट्र) – कभी बकरियां चराते हुए किताबों में डूबे रहने वाले बिरदेव सिद्धप्पा डोणे ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से इतिहास रच दिया है। कोल्हापुर जिले के कागल तहसील के छोटे से गांव यमगे के निवासी बिरदेव ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 551वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और गांव का नाम गर्व से ऊंचा कर दिया। अब वह भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल होंगे।
भेड़-बकरी चराने वाले परिवार से निकले बिरदेव
बिरदेव एक साधारण परिवार से आते हैं, जिनकी जीविका का साधन भेड़-बकरी पालन है। परिवार के पास मात्र एक एकड़ जमीन है, और यही पारंपरिक पेशा उनकी आजीविका का आधार रहा है। आर्थिक तंगी के बावजूद बिरदेव ने हार नहीं मानी और शिक्षा के प्रति अपनी लगन बनाए रखी।

प्राथमिक शिक्षा गांव के स्कूल से, फिर इंजीनियरिंग तक का सफर
अपनी पढ़ाई की शुरुआत बिरदेव ने गांव के जिला परिषद स्कूल से की। 10वीं और 12वीं कक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर उन्होंने साबित कर दिया कि साधन सीमित हों तो भी सपने बड़े हो सकते हैं। इसके बाद उन्होंने पुणे के प्रतिष्ठित कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की।
दिल्ली में UPSC की तैयारी, तीसरे प्रयास में मिली सफलता
इंजीनियरिंग के बाद बिरदेव दिल्ली चले गए, जहां उन्होंने दो साल तक UPSC की कठिन तैयारी की। पहले दो प्रयासों में असफलता हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। तीसरे प्रयास में उन्होंने अपनी मंजिल पा ली और 551वीं रैंक के साथ सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली।
परिणाम के समय बकरियां चरा रहे थे बिरदेव
जब UPSC का परिणाम घोषित हुआ, तब बिरदेव बेलगांव (कर्नाटक) में अपने चाचा के साथ भेड़-बकरियां चरा रहे थे। परिणाम की जानकारी उन्हें एक दोस्त के फोन से मिली। दोस्त ने खुशी-खुशी बताया, “तुम पास हो गए हो, तुम्हारा नाम सूची में है।” यह खबर सुनकर भी बिरदेव ने पहले अपना काम पूरा किया और फिर परिवार और रिश्तेदारों के साथ खुशी साझा की।
भेड़-बकरियों के बीच मिली प्रेरणा
बिरदेव बताते हैं कि बकरियां चराते समय जब भी उन्हें खाली समय मिलता, वह किताबें निकालकर पढ़ाई में जुट जाते थे। उनका कहना है, “मेहनत के साथ-साथ हमारी भेड़-बकरी मौली का भी आशीर्वाद मेरे साथ था।” उनकी एक तस्वीर, जिसमें वह भेड़-बकरियों के बीच खड़े होकर अभिनंदन स्वीकार करते दिख रहे हैं, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है।

परिवार और गांव में जश्न का माहौल
बिरदेव के पिता सिद्धप्पा ने बेटे की सफलता पर गर्व जताते हुए कहा, “लड़के ने दिन-रात मेहनत की है।” बिरदेव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों, चाचा और रिश्तेदारों को दिया। उनके भाई, जो भारतीय सेना में नायक के पद पर कार्यरत हैं, ने भी उनकी पढ़ाई में सहयोग किया।
अब भी जुड़ाव पारंपरिक जीवन से
रिजल्ट के बाद भी बिरदेव अपने पुराने जीवन से पूरी तरह दूर नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, “भेड़-बकरी पालन हमारे परिवार की परंपरा है। इसे अचानक छोड़ना मेरे लिए संभव नहीं है। मुझे अपने जानवरों से बेहद लगाव है।”
गांव में लौटने की तैयारी
फिलहाल बेलगांव के भवानी नगर में उनके रिश्तेदार और ग्रामीण बिरदेव को बधाई देने के लिए जुट रहे हैं। गांव से भी लगातार फोन आ रहे हैं। बिरदेव ने कहा कि वह जल्द ही अपने गांव लौटेंगे और वहां के लोगों के साथ अपनी खुशी साझा करेंगे।

