जयपुर समेत पूरे प्रदेश में अधिवक्ता, बिल्डर और व्यापारी सड़कों पर; सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में लटके ताले
- 5 से 45 फीसदी तक एक झटके में बढ़ोतरी से रजिस्ट्री ठप, सरकार को हर दिन करोड़ों के राजस्व का नुकसान
- 7 दिन में फैसला वापस नहीं लेने पर कांग्रेस ओबीसी विभाग और व्यापार मंडल ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
जयपुर/ योगेश शर्मा
राजस्थान में बिना जन प्रतिनिधियों से सलाह-मशविरा किए और बंद कमरे में ली गई डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमिटी) दरों में बढ़ोतरी के फैसले के खिलाफ विरोध की आग लगातार तेज होती जा रही है। जयपुर समेत पूरे प्रदेश में अधिवक्ता, बिल्डर, व्यापारी और आम जनता इस तुगलकी फरमान के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है। जनता और हितधारकों का एक ही सवाल है कि आखिर ऐसी क्या प्रशासनिक मजबूरी थी कि डीएलसी दरों को एक झटके में 5 से बढ़ाकर 45 प्रतिशत तक कर दिया गया?
इस विवाद पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी ओबीसी विभाग के उपाध्यक्ष और जयपुर व्यापार मंडल के प्रवक्ता नरेंद्र मारवाल ने सरकार के इस कदम को पूरी तरह जनविरोधी करार देते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
आम जनता पर दोहरी मार: आशियाना खरीदना होगा 20 लाख तक महंगा
नरेंद्र मारवाल ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि पहले से ही बेकाबू महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ रखी है। वर्तमान में सरिया, सीमेंट, कंक्रीट, रोड़ी और बजरी के दाम आसमान छू रहे हैं, साथ ही मजदूरी भी बढ़ गई है। ऐसे में यदि डीएलसी दरें 45 प्रतिशत तक बढ़ेंगी, तो मकान खरीदना मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के बस की बात नहीं रहेगा।
मारवाल ने गणित समझाते हुए कहा कि इस बढ़ोतरी से फ्लैट और प्लॉट की कीमतें सीधे 10 से 20 लाख रुपए तक बढ़ जाएंगी। यह आम जनता पर दोहरी मार है, जिससे न सिर्फ घर खरीदने का सपना देख रहे लोग, बल्कि छोटे बिल्डर और डेवलपर भी पूरी तरह आर्थिक संकट में आ जाएंगे।
रजिस्ट्री ठप: जनता परेशान, सरकार को करोड़ों के राजस्व का घाटा
डीएलसी दरों में इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी के विरोध में जयपुर बार एसोसिएशन ने पूर्ण हड़ताल का ऐलान कर दिया है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि शहर के सभी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में ताले लटके हुए हैं। न तो जमीनों की रजिस्ट्री हो रही है, न म्यूटेशन और न ही अन्य कोई दस्तावेजी काम।
अधिवक्ताओं का साफ कहना है कि जब तक सरकार इस अधिसूचना को वापस नहीं लेती, उनकी हड़ताल जारी रहेगी। इस गतिरोध के कारण आम आदमी बुरी तरह पिस रहा है। जिन लोगों ने होम लोन पास करा लिए थे या जिनकी शादियों की तारीखें तय हैं, वे सब दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। दूसरी ओर, रजिस्ट्री बंद होने से प्रदेश सरकार को भी प्रतिदिन करोड़ों रुपए के स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन शुल्क का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
‘राइजिंग राजस्थान’ और जमीनी हकीकत में विरोधाभास: मारवाल
नरेंद्र मारवाल ने सरकार की आर्थिक नीतियों में विरोधाभास उजागर करते हुए कहा कि एक तरफ सरकार ‘राइजिंग राजस्थान’ के नाम पर वैश्विक निवेशकों से हजारों करोड़ के एमओयू (MOU) कर रही है और उन्हें निवेश का न्योता दे रही है। वहीं दूसरी तरफ, जमीन की दरों में इतनी बेतहाशा वृद्धि की जा रही है। ऐसे माहौल में कोई भी बाहरी निवेशक राजस्थान आने से कतराएगा।
मारवाल ने आगाह किया कि रियल एस्टेट सेक्टर से सीमेंट, सरिया, टाइल्स, पेंट और लेबर समेत 200 से अधिक सहायक उद्योग जुड़े हैं। इस सेक्टर के ठप होने से पूरी चेन रुक जाएगी, जिससे बाजार में मंदी आएगी और बेरोजगारी का ग्राफ तेजी से बढ़ेगा।
अधिवक्ताओं और रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप, पारदर्शिता की मांग
जयपुर के विभिन्न बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कानूनन एक वित्त वर्ष में डीएलसी दरों में केवल एक बार ही संशोधन किया जा सकता है, जबकि कुछ महीने पहले ही दरें बढ़ाई गई थीं। कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कमेटी में स्थानीय विधायक, मेयर, बार एसोसिएशन और बिल्डर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं कर लोकतांत्रिक परंपराओं को ताक पर रख दिया गया।
बिल्डरों का कहना है कि बैंक लोन डीएलसी दर के आधार पर ही देते हैं। दरें बढ़ने से लोन की राशि और ब्याज का बोझ बढ़ेगा। त्योहारों के इस सीजन में पहले ही प्रॉपर्टी की बिक्री धीमी है, ऐसे में यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए आखिरी कील साबित हो सकता है।
संगठनों की प्रमुख मांगें:
- फैसले की तत्काल वापसी: अधिसूचना को तुरंत निरस्त कर पुरानी डीएलसी दरें बहाल की जाएं।
- हितधारकों से संवाद: नई दरें तय करने से पहले जनप्रतिनिधियों, बार, बिल्डर और व्यापारिक संगठनों से लिखित सुझाव लिए जाएं।
- स्थिरता और राहत: एक साल में एक से अधिक बार संशोधन न हो और आम आदमी को राहत देने के लिए कुछ विशेष स्लैब में रियायत दी जाए।
आर-पार की लड़ाई का अल्टीमेटम
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, हर दिन हो रहे करोड़ों के राजस्व नुकसान से राजस्व विभाग भारी दबाव में है, लेकिन अधिवक्ता और व्यापारी भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। नरेंद्र मारवाल ने सरकार को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आगामी 7 दिनों के भीतर सरकार ने इस जनविरोधी फैसले को वापस नहीं लिया, तो कांग्रेस ओबीसी विभाग और व्यापार मंडल संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। इसके तहत सड़कों पर उग्र प्रदर्शन, जिला कलेक्टर को ज्ञापन और जरूरत पड़ने पर माननीय न्यायालय की शरण ली जाएगी।