कोलकाता/ आसिम अमिताव बिस्वाल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव तब देखने को मिला जब भाजपा कार्यकर्ताओं ने राज्य में पार्टी की पहली सरकार बनने की उम्मीद में एक भव्य प्रदर्शन किया। इस शक्ति प्रदर्शन की सबसे खास बात कार्यकर्ताओं का पहनावा और उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए प्रतीक थे।
जोश के दो बड़े प्रतीक
कार्यकर्ताओं के बीच दो तस्वीरें सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं, जो पार्टी की विचारधारा और वर्तमान नेतृत्व के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाती हैं:
- श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तस्वीर: कई कार्यकर्ताओं ने अपने सीने पर जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तस्वीर लगा रखी थी। यह बंगाल की अस्मिता और पार्टी की वैचारिक जड़ों से जुड़ाव को प्रदर्शित करता है।
- शुभेंदु अधिकारी का पोस्टर: कार्यकर्ताओं के सिर पर शुभेंदु अधिकारी की तस्वीरों वाले टोपी और पोस्टर नजर आए। यह राज्य में उनके बढ़ते कद और जमीनी स्तर पर उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है।
कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह
कोलकाता सहित राज्य के विभिन्न जिलों में विजय जुलूस जैसा माहौल देखा गया। कार्यकर्ताओं का मानना है कि राज्य में ‘असल परिवर्तन’ की शुरुआत हो चुकी है।
प्रदर्शन की मुख्य विशेषताएं:
- नारेबाजी और जयघोष: ‘जय श्री राम’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।
- सांस्कृतिक पुट: पारंपरिक ढाक (ढोल) की थाप पर कार्यकर्ता थिरकते नजर आए, जो बंगाल की संस्कृति और राजनीतिक जीत के मिश्रण को दर्शाता है।
- महिला शक्ति: इस प्रदर्शन में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही, जो पार्टी के महिला सशक्तिकरण के एजेंडे को मजबूती देती दिखीं।
राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी और शुभेंदु अधिकारी की तस्वीरों का एक साथ होना ‘विरासत और वर्तमान’ का एक शक्तिशाली मेल है। जहाँ मुखर्जी बंगाल के गौरव और भाजपा की नींव का प्रतीक हैं, वहीं अधिकारी उस आक्रामक नेतृत्व का चेहरा हैं जिसने तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाई है।
”यह सिर्फ एक राजनीतिक रैली नहीं, बल्कि बंगाल की जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है जो अब एक नया विकल्प देख रही है।” — एक स्थानीय भाजपा समर्थक
इस जोश और जुनून ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल की राजनीति में भाजपा अब एक निर्णायक भूमिका में है और उसके कार्यकर्ता सत्ता के गलियारों तक पहुंचने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।