बंगाल चुनाव 2026: 92.9% रिकॉर्ड मतदान ने उड़ाए राजनीतिक दिग्गजों के होश; ‘दीदी’ की हैट्रिक या ‘कमल’ का उदय?

गौरव कोचर 

कोलकाता | 01 मई 2026

​पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दोनों चरणों का मतदान संपन्न होने के बाद राज्य की राजनीतिक फिजा पूरी तरह बदल चुकी है। चुनाव आयोग द्वारा जारी अंतिम आंकड़ों के अनुसार, इस बार बंगाल ने 92.9% मतदान के साथ एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह न केवल बंगाल के इतिहास का, बल्कि आधुनिक भारत के किसी भी बड़े राज्य का अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है।

मतदान के आंकड़ों का विश्लेषण: कहाँ कितनी हुई वोटिंग?

​दो चरणों में हुए इस चुनाव में मतदाताओं ने जबरदस्त उत्साह दिखाया। विशेष रूप से ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में लंबी कतारें देखी गईं।

  • उत्तरी बंगाल: कूचबिहार और अलीपुरद्वार जैसे जिलों में मतदान का आंकड़ा 95% को पार कर गया।
  • दक्षिणी बंगाल: टीएमसी के गढ़ माने जाने वाले दक्षिण 24 परगना और बीरभूम में 91.8% मतदान दर्ज किया गया।
  • महिला शक्ति: इस बार भी महिलाओं का मतदान प्रतिशत (93.2%) पुरुषों के मुकाबले लगभग 1.5% अधिक रहा, जिसने विश्लेषकों को चौंका दिया है।

रिकॉर्ड वोटिंग के पीछे का ‘सत्य’

​इतने भारी मतदान के पीछे दो प्रमुख कारण माने जा रहे हैं:

  1. वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण: चुनाव आयोग ने इस बार लगभग 90 लाख संदिग्ध और दोहरे नामों को सूची से हटाया था। मतदाता सूची के ‘साफ’ होने से प्रतिशत में यह भारी उछाल आया है।
  2. ध्रुवीकरण और उत्साह: दोनों ही पक्षों (BJP और TMC) ने इस चुनाव को ‘अस्तित्व की लड़ाई’ बना दिया, जिसके कारण न्यूट्रल वोटर भी बड़ी संख्या में घर से बाहर निकला।

सियासी गलियारों में खलबली: किसे होगा नफा-नुकसान?

TMC: “योजनाओं पर भरोसे की मुहर”

​तृणमूल कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि भारी मतदान ममता बनर्जी की ‘लक्ष्मी भंडार’ और ‘कन्याश्री’ जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का परिणाम है। पार्टी का दावा है कि महिला मतदाताओं का बड़ा हिस्सा उनके पक्ष में है, जो उन्हें सत्ता में वापसी कराएगा।

BJP: “परिवर्तन की सुनामी”

​भारतीय जनता पार्टी इस उच्च मतदान प्रतिशत को ‘सत्ता विरोधी लहर’ (Anti-Incumbency) के रूप में देख रही है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि जब भी जनता बदलाव चाहती है, तब इसी तरह का भारी मतदान होता है। संदेशखाली और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों ने जनता को पोलिंग बूथ तक खींचने का काम किया है।

वाम-कांग्रेस गठबंधन:

​तीसरे मोचे की नजर उन सीटों पर है जहाँ त्रिकोणीय मुकाबले ने गणित बिगाड़ दिया है। यदि वामपंथी वोट प्रतिशत में 5-7% की भी वृद्धि होती है, तो यह सीधे तौर पर टीएमसी के वोट बैंक में सेंध लगाएगा, जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।

एग्जिट पोल और जमीनी हकीकत

​विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल एक कांटे की टक्कर की ओर इशारा कर रहे हैं। कुछ पोल भाजपा को 145-155 सीटें (बहुमत का आंकड़ा 148 है) देकर सबसे बड़ी पार्टी बता रहे हैं, जबकि अन्य ममता बनर्जी की वापसी की भविष्यवाणी कर रहे हैं।

विशेषज्ञ की राय: “बंगाल में 90% से ऊपर का मतदान हमेशा सत्ता परिवर्तन या सत्ता के प्रति प्रचंड समर्थन का संकेत होता है। इस बार मौन मतदाता (Silent Voter) ही तय करेगा कि कोलकाता के ‘राइटर्स बिल्डिंग’ की चाबी किसके पास जाएगी।”

 

परिणाम का इंतजार

​पूरे देश की नजरें अब 04 मई 2026 पर टिकी हैं, जब मतों की गिनती शुरू होगी। क्या ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रहेंगी, या बंगाल ‘सोनार बांग्ला’ के नारे के साथ भाजपा को पहली बार सत्ता की कुर्सी सौंपेगा? इसका फैसला ईवीएम में कैद हो चुका है।

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