नई दिल्ली: प्रीति बालानी
देश के ऊर्जा क्षेत्र और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार द्वारा फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) तकनीक को बढ़ावा देने से न सिर्फ देश की विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को भी गति मिलेगी।
एक हालिया बयान में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने फ्लेक्स-फ्यूल के दूरगामी आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इस तकनीक के आने से डिस्टिलरीज को लगभग 266 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ेगा, जिसके बदले देश को 195 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की सीधी बचत होगी।
कच्चे तेल के आयात में कमी और पर्यावरण को लाभ
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को अपनाने से भारत की तेल आयात पर निर्भरता काफी कम होने वाली है।
- आयात में कमी: इससे कच्चे तेल के आयात में लगभग 0.28 लाख मीट्रिक टन की कमी आएगी।
- कार्बन उत्सर्जन में गिरावट: पर्यावरण के मोर्चे पर यह कदम गेम-चेंजर साबित होगा, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में लगभग 0.86 लाख मीट्रिक टन की कमी दर्ज की जाएगी।
- किसानों को सीधा फायदा: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तेल आयात के लिए जो 160 करोड़ रुपये देश से बाहर जाते थे, वे अब सीधे भारतीय किसानों की जेब में पहुंचेंगे। देश के विशाल दोपहिया वाहन उद्योग में फ्लेक्स-फ्यूल का विस्तार एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम साबित होगा।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की तुलना में क्यों बेहतर है फ्लेक्स-फ्यूल?
ई-85 (E-85) फ्लेक्स ईंधन के फायदे गिनाते हुए बताया गया कि यह तकनीक कई मायनों में इलेक्ट्रिक वाहनों से अधिक व्यावहारिक और किफायती है:
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ई-85 फ्लेक्स ईंधन |
इलेक्ट्रिक वाहन (EV) |
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लागत और निर्माण |
वाहन निर्माण की लागत बेहद कम है। |
बैटरी घटकों के कारण निर्माण लागत अधिक है। |
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बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) |
बुनियादी ढांचे में न्यूनतम पूंजीगत व्यय की आवश्यकता। |
चार्जिंग नेटवर्क के लिए भारी निवेश की जरूरत। |
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विस्तार की गति |
EV नेटवर्क की तुलना में 10 से 15 गुना तेजी से विस्तार संभव। |
विस्तार की गति अपेक्षाकृत धीमी। |
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निर्भरता |
घरेलू स्तर पर उत्पादित जैव ईंधन (इथेनॉल) पर निर्भर। |
बैटरी और कच्चे माल के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भरता। |
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उत्सर्जन |
बैटरी जनित कार्बन फुटप्रिंट से पूरी तरह मुक्त। |
उत्पादन प्रक्रिया के दौरान भारी कार्बन उत्सर्जन। |
बड़ी बात: फ्लेक्स-फ्यूल की मांग बढ़ने से इथेनॉल के कच्चे माल की मांग में तेजी आएगी, जिससे हमारे किसानों को तुरंत और सीधे आय सहायता प्राप्त होगी।
उपभोक्ताओं की जेब पर असर: 3 साल में वसूल होगी वाहन की लागत
पुरी ने स्पष्ट किया कि फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित होगी। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार:
- यदि ई-85 ईंधन की कीमत ई-20 की तुलना में कम रखी जाती है, तो ईंधन की कम कीमत होने के कारण उपभोक्ताओं को बड़ी बचत होगी।
- इस बचत के माध्यम से उपभोक्ता मात्र तीन वर्षों में ही अपने वाहन की पूरी लागत वसूल कर सकते हैं।
- सरकार इस किफायती फ्लेक्स-फ्यूल प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए एक सहायक और प्रभावी नीतिगत ढांचे पर सक्रियता से विचार कर रही है।
भ्रम दूर: पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणित है यह तकनीक
फ्लेक्स-फ्यूल को लेकर आम जनता में फैली गलत धारणाओं को खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि भारत में ई-20 को लागू करने से पहले SIAM, ARAI, IOCL और प्रमुख वाहन निर्माताओं ने व्यापक और कड़े परीक्षण किए हैं।
वैश्विक अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि ब्राजील ने उच्च इथेनॉल मिश्रणों को बेहद सफलतापूर्वक अपनाया है। पुरी ने खुद 2006-2008 के बीच ब्रासीलिया में अपनी नियुक्ति के दौरान इसे करीब से देखा था। यह अनुभव दर्शाता है कि फ्लेक्सी-फ्यूल तकनीक पूरी तरह प्रमाणित, विश्वसनीय और बड़े पैमाने पर विस्तार करने योग्य है।
हीरो मोटोकॉर्प ने बढ़ाई कदम
इस राष्ट्रीय मुहिम में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए हीरो मोटोकॉर्प की सराहना की गई। कंपनी ने ऐसी नई मोटरसाइकिलें पेश की हैं जो उन्नत ईंधन प्रणालियों और आंतरिक दहन इंजन (ICE) से लैस हैं। ये वाहन ई-20 से लेकर ई-85 तक किसी भी पेट्रोल और इथेनॉल मिश्रण पर आसानी से चल सकते हैं।