फ्रांस ने अमेरिकी राजदूत को किया तलब, समझिए पूरा विवाद
25 अगस्त 2025 | गौरव कोचर | टेलीग्राफ टाइम्स |
पेरिस और वॉशिंगटन के बीच कूटनीतिक तनाव उस वक्त तेज़ हो गया जब फ्रांस ने अमेरिकी राजदूत चार्ल्स कुश्नर को तलब कर लिया। यह कदम अमेरिका की ओर से आए उस बयान के बाद उठाया गया है, जिसमें फ्रांस पर यहूदी-विरोध (Antisemitism) से निपटने में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया गया।
मामला क्या है?
दरअसल, राजदूत कुश्नर ने हाल ही में वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक खुला पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा कि:
- फ्रांसीसी सरकार यहूदी-विरोधी घटनाओं को रोकने में असफल रही है।
- फ्रांस का इज़राइल की आलोचना करना और फ़िलिस्तीनी राज्य की मान्यता की कोशिशें चरमपंथ को हवा दे सकती हैं।
- उनका यह भी दावा था कि आज के समय में “Anti-Zionism ही Antisemitism है” और इसे अलग नहीं देखा जा सकता।
यह पत्र सीधे तौर पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की नीति पर सवाल खड़ा करता है।
फ्रांस की कड़ी प्रतिक्रिया
- फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने इस बयान को “अस्वीकार्य और अनुचित हस्तक्षेप” बताया।
- मंत्रालय का कहना है कि यह बयान 1961 के वियना सम्मेलन की उस भावना के खिलाफ है, जो राजदूतों को मेज़बान देश के आंतरिक मामलों में सार्वजनिक रूप से हस्तक्षेप से रोकती है।
- मंत्रालय ने साफ कहा कि फ्रांस अपने नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर पूरी तरह सतर्क है।
- इसी कारण राजदूत कुश्नर को सोमवार को पेरिस स्थित विदेश मंत्रालय Quai d’Orsay बुलाया गया है।
अमेरिका का रुख
- अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कुश्नर का समर्थन किया है।
- स्टेट डिपार्टमेंट के उप प्रवक्ता टोमी पिगॉट ने कहा कि राजदूत कुश्नर “अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाने में उत्कृष्ट काम कर रहे हैं।”
- अमेरिका ने संकेत दिया कि यह उनकी आधिकारिक नीति से मेल खाता है और फ्रांस को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
- फ्रांस इस समय फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता देने पर विचार कर रहा है।
- वहीं, हाल के वर्षों में फ्रांस में Antisemitism की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।
- 2023 में ऐसे 1,600 से ज़्यादा मामले दर्ज हुए, जबकि 2024 में भी आंकड़ा 1,500 के करीब रहा।
- फ्रांस और अमेरिका के बीच पहले से ही व्यापार, लेबनान में संयुक्त राष्ट्र मिशन और यूक्रेन नीति को लेकर मतभेद मौजूद हैं। यह नया विवाद रिश्तों में और कड़वाहट ला सकता है।
- क्या हुआ? अमेरिकी राजदूत ने फ्रांस पर यहूदी-विरोध रोकने में नाकामी और इज़राइल-विरोधी माहौल को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
- फ्रांस की प्रतिक्रिया? बयान को अस्वीकार्य बताते हुए राजदूत को तलब कर लिया गया।
- अमेरिका का रुख? अपने राजदूत का समर्थन किया और उनकी बातों को सही ठहराया।
- महत्त्व क्यों? यह विवाद ऐसे समय में हुआ है जब फ्रांस फ़िलिस्तीनी राज्य मान्यता जैसे संवेदनशील कदम पर काम कर रहा है और यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद नाज़ुक है।