फ्यूचर का टीचर’ कैंपेन में गोड्डा के शिक्षक रीतेश रंजन का चयन: नवाचारी शिक्षण विधियों को मिला राष्ट्रीय मंच

गोड्डा /झारखंड/ नेहा रंजन/शिक्षा के क्षेत्र में पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों से इतर नवाचार, रचनात्मकता और तकनीक आधारित प्रयोगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे प्रतिष्ठित ‘फ्यूचर का टीचर’ कैंपेन में झारखंड के गोड्डा जिले के शिक्षक रीतेश रंजन के वीडियो को शामिल किया गया है। एडटेक संस्था ConveGenius की इस राष्ट्रीय पहल में रीतेश रंजन के शिक्षण प्रयासों को स्थान मिलना पूरे जिले और राज्य के शैक्षणिक गलियारों के लिए गर्व का विषय बना हुआ है।

​नवाचार और बाल-केंद्रित शिक्षा के प्रति समर्पण

​रीतेश रंजन वर्तमान में गोड्डा जिले के महागामा अंचल अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय, चिल्हा में सहायक शिक्षक के पद पर पदस्थापित हैं। वे लंबे समय से ग्रामीण परिवेश के बच्चों के सीखने के स्तर (लर्निंग आउटकम) को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न नवाचारी गतिविधियों, गतिविधि-आधारित शिक्षण (Activity-Based Learning) और सरल डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते रहे हैं।

​विद्यालय में सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों की कक्षा में उपस्थिति बढ़ाने, कठिन अवधारणाओं को खेल-खेल में समझाने और छात्रों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की दिशा में उनके प्रयास लगातार सराहनीय रहे हैं। इसी समर्पण को उनके द्वारा साझा किए गए वीडियो में रेखांकित किया गया, जिसे कैंपेन की चयन समिति ने सराहा।

​शिक्षकों के लिए प्रेरणा बना यह मंच

​कैंपेन में अपने वीडियो का चयन होने पर शिक्षक रीतेश रंजन ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ConveGenius और ‘Future Ka Teacher’ की पूरी टीम के प्रति आभार प्रकट किया।

​”जब किसी शिक्षक के धरातलीय नवाचारों और अथक प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मंच और पहचान मिलती है, तो यह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि पूरे शिक्षक समुदाय के मनोबल को बढ़ाती है। यह सम्मान मुझे भविष्य में बच्चों की शिक्षा के लिए और अधिक ऊर्जा व नए प्रयोगों के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा।”

— रीतेश रंजन, सहायक शिक्षक

 

​क्या है ‘फ्यूचर का टीचर’ अभियान?

​‘फ्यूचर का टीचर’ अभियान देश भर के उन शिक्षकों को एक सशक्त मंच प्रदान करता है जो भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर आधुनिक, समावेशी और प्रभावशाली शिक्षण विधियां अपना रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य कक्षा-कक्ष के उन सफल मॉडल्स को सामने लाना है, जिन्हें अन्य शिक्षक भी अपने विद्यालयों में लागू कर सकें। रीतेश रंजन जैसे शिक्षकों की आवाज और अनुभवों का इस मंच तक पहुंचना यह सिद्ध करता है कि दूरदराज के सरकारी विद्यालयों में भी शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय और सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

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