नरेश गुनानी
जयपुर, 12 जून 2026। अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम अपर्णा अरोरा ने राजस्थान स्टेट माइंस एवं मिनरल्स (आरएसएमएम) को ‘फ्यूचरिस्टिक एप्रोच’ (भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण) अपनाते हुए खनिजों के उत्पादन, विपणन और वार्षिक कारोबार को तेजी से बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सचिवालय के मंथन कक्ष में शुक्रवार को आयोजित आरएसएमएम की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने यह बात कही।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने जोर देकर कहा कि खेती-किसानी के लिए बेहद जरूरी रॉक फास्फेट के उत्पादन में आरएसएमएम का लगभग देशव्यापी एकाधिकार है। यदि वित्तीय वर्ष के शेष महीनों के लिए एक स्पष्ट और मजबूत रोडमैप बनाकर काम किया जाए, तो इसके बेहद सकारात्मक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1922 करोड़ का रहा कारोबार
समीक्षा बैठक के दौरान बताया गया कि राजस्थान एक खनिज संपन्न प्रदेश है और आरएसएमएम द्वारा मुख्य रूप से रॉक फास्फेट, लाइमस्टोन, लिग्नाइट और जिप्सम का खनन व विपणन किया जा रहा है।
हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान आरएसएमएम का वार्षिक टर्नओवर 1,922 करोड़ रुपए से अधिक का रहा है। अपर्णा अरोरा ने कंपनी की लाभदायकता और टर्नओवर को और अधिक बढ़ाने के लिए समग्र एवं योजनाबद्ध प्रयास करने की आवश्यकता जताई।
खनन एवं बिक्री के मुख्य आंकड़े (वित्तीय वर्ष 2025-26)
आरएसएमएम द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष में कुल 70 करोड़ 64 लाख टन खनिजों की बिक्री की गई, जिसका विवरण इस प्रकार है:
|
खनिज का नाम |
कुल बिक्री (टन में) |
|---|---|
|
लाइमस्टोन (चुना पत्थर) |
41 लाख 95 हजार टन |
|
रॉक फास्फेट |
17 लाख 65 हजार टन |
|
लिग्नाइट |
9 लाख 24 हजार टन |
|
जिप्सम |
1 लाख 80 हजार टन |
अनुसंधान के लिए ‘आरएंडडी प्रकोष्ठ’ का होगा गठन
आरएसएमएम के प्रबंध निदेशक पी. रमेश ने बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान में अब एक आरएंडडी (अनुसंधान एवं विकास) प्रकोष्ठ का गठन किया जा रहा है।
आरएंडडी प्रकोष्ठ के मुख्य कार्य:
- खनन क्षेत्र में आधुनिक शोध और रिसर्च को बढ़ावा देना।
- देश-दुनिया में उपयोग हो रही नवीनतम तकनीकों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालना।
- बाजार की मांग (Demand) और आपूर्ति (Supply) का समय-समय पर गहन अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करना।
प्रबंध निदेशक ने भरोसा दिलाया कि चालू वित्तीय वर्ष में वार्षिक कारोबार में और अधिक उल्लेखनीय बढ़ोतरी करने के समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।
पोटाश खनन और नए क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा अरोरा ने भविष्य की रणनीतियों पर बात करते हुए कहा कि आरएसएमएम को प्रदेश में पोटाश के एक्सप्लोरेशन (अन्वेषण) और खनन की संभावनाओं को तलाशने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। इसके साथ ही कंपनी को नए क्षेत्रों और नए खनिजों के कारोबार में उतरने की संभावनाओं का भी आकलन करना चाहिए।
प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने के निर्देश
प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निम्नलिखित निर्देश दिए:
- विधानसभा के लंबित प्रश्नों के उत्तर तत्काल भिजवाए जाएं।
- बकाया ऑडिट पेराज का त्वरित निस्तारण किया जाए।
- संस्थान में रिक्त चल रहे पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
- जांच के विभिन्न प्रकरणों का समयबद्ध निष्पादन हो।
- पदोन्नति समिति की बैठक (DPC) आयोजित कर कार्मिकों की बकाया पदोन्नति की जाए।
बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में माइंस विभाग और आरएसएमएम के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें:
- नम्रता वृष्णि (विशिष्ट सचिव, माइंस)
- राकेश कुमार (उप सचिव, माइंस)
- श्रीकृष्ण शर्मा (ओएसडी)
- सुनील कुमार वर्मा (ओएसडी, तकनीकी)
- कीर्ति राठौड़ (कार्यकारी निदेशक प्रशासन, आरएसएमएम)
- भारती राज (वित्तीय सलाहकार)
- अरुण सिंह (समूह महाप्रबंधक, लिग्नाइट)
- शैलेश जोशी (प्रभारी, लाइमस्टोन)
- नरेश एलयानी (समूह महाप्रबंधक, परियोजना)
- हनुमत सिंह (प्रभारी, मार्केटिंग)
- शंकर लाल (प्रभारी, बजरी) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।