फिक्की राजस्थान 10वां एचआर एवं स्किल्स समिट: ‘इंडिया@2047’ के विजन हेतु उद्योग और शिक्षा जगत में साझेदारी अनिवार्य

फिक्की राजस्थान 10वां एचआर एवं स्किल्स समिट: ‘इंडिया@2047’ के विजन हेतु उद्योग और शिक्षा जगत में साझेदारी अनिवार्य

| योगेश शर्मा

जयपुर। तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीकी युग में भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए फिक्की (FICCI) राजस्थान स्टेट काउंसिल द्वारा ’10वें एचआर एवं स्किल्स समिट’ का भव्य आयोजन किया गया। इस समिट में शिक्षाविदों, नीति निर्धारकों और उद्योग जगत के दिग्गजों ने एक सुर में स्वीकार किया कि भविष्य की कार्य दुनिया (Workforce) को तैयार करने के लिए अब पाठ्यक्रम निर्माण से लेकर कौशल विकास तक, उद्योग और शिक्षा जगत का मिलकर काम करना समय की मांग है।

पाठ्यक्रम में बदलाव और साझेदारी पर जोर

​समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. श्वेता जैन (निदेशक, आईबीएस जयपुर) ने कहा कि शिक्षा संस्थानों को अब केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि:

  • ​पाठ्यक्रम में वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय साक्षरता को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
  • ​उद्योग जगत के विशेषज्ञों को ‘मेंटर्स और सह-शिक्षकों’ के रूप में कक्षाओं तक पहुंचना होगा।
  • ​देश का लक्ष्य वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) को 50% तक पहुंचाना है, जिसमें निजी क्षेत्र की भूमिका (जो वर्तमान में 60-62% शिक्षा प्रदान कर रहे हैं) अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

भविष्य का कार्यक्षेत्र: डेटा और सहानुभूति का संगम

​आईबीएम इंडिया के पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. अकील बुसरई ने एचआर की बदलती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पारंपरिक ‘एनुअल ट्रेनिंग बुकलेट्स’ और पुराने ‘सक्सेशन प्लान’ अब प्रभावी नहीं हैं।

“आज के दौर में डेटा का उपयोग कर प्रत्येक कर्मचारी की जरूरत के अनुसार कस्टमाइज़्ड ट्रेनिंग तैयार की जानी चाहिए। एचआर की सबसे बड़ी ताकत व्यक्तिगत जुड़ाव और सहानुभूति है, जो कोविड-19 जैसे संकट के समय में साबित हो चुकी है।”

 

राजस्थान का बढ़ता प्रभाव और तकनीकी चुनौतियां

​फिक्की राजस्थान के को-चेयरमैन मनीष गुप्ता ने बताया कि राजस्थान अब विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। उन्होंने चार प्रमुख परिवर्तनकारी क्षेत्रों को रेखांकित किया:

  1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  2. रोबोटिक्स
  3. इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV)
  4. रिन्यूएबल एनर्जी

​उन्होंने आग्रह किया कि एचआर लीडर्स को कर्मचारियों को केवल नौकरी देने के बजाय उन्हें इन क्षेत्रों के लिए ‘फ्यूचर रेडी’ बनाना होगा।

एआई बनाम मानव संसाधन (HR)

​अक्षय इन्फ्रासिस के सीएमडी अक्षय हाडा ने एक महत्वपूर्ण बिंदु रखते हुए कहा कि भले ही एआई और रोबोटिक्स का युग आ गया है, लेकिन एआई कभी भी एचआर की जगह नहीं ले सकता। एचआर भावनाओं को समझने, नकारात्मकता को दूर करने और मानवीय जुड़ाव बनाने का माध्यम है, जो किसी भी मशीन के लिए संभव नहीं है।

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