नई दिल्ली, 26 जून 2026 | नरेश गुनानी केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने फार्मास्युटिकल क्षेत्र में अनुसंधान (Research) और नवाचार (Innovation) को गति देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी कारोबार में आसानी को बेहतर बनाने की दिशा में औषध नियमावली, 1945 (Drugs Rules, 1945) में संशोधन का एक महत्वपूर्ण मसौदा (Draft) प्रस्तावित किया है।
इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य एनालिटिकल और नॉन-क्लिनिकल टेस्टिंग के लिए विदेशों से कम मात्रा में दवाओं के आयात (Import) की प्रक्रिया को बेहद सरल और सुगम बनाना है।
क्या है नई ‘एकनॉलेजमेंट-बेस्ड’ प्रणाली?
आमतौर पर जांच, टेस्ट या विश्लेषण के लिए दवाओं के आयात की अनुमति लेने की प्रक्रिया को ‘फॉर्म 11’ के नाम से जाना जाता है। नए संशोधित प्रावधानों के तहत अब जटिल लाइसेंसिंग प्रक्रिया की जगह एक एकनॉलेजमेंट-बेस्ड (पावती-आधारित) सिस्टम शुरू किया जा रहा है।
- आसान प्रक्रिया: दवाओं का आयात करने के इच्छुक आवेदकों को अब केवल एक ‘प्रायर इंटिमेशन फॉर्म’ (पहले से सूचना देने वाला फॉर्म) ऑनलाइन जमा करना होगा।
- तुरंत आयात: यह ऑनलाइन सूचना फॉर्म जमा करते ही आवेदक को जो पावती (Acknowledgement) मिलेगी, उसी के आधार पर वे सीधे दवा का आयात कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें लंबे समय तक सरकारी मंजूरी या लाइसेंस का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
इन खास दवाओं पर पहले की तरह लागू रहेगा लाइसेंस
यह आसान प्रक्रिया कम मात्रा में आयात की जाने वाली लगभग सभी दवाओं पर लागू होगी, लेकिन सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए कुछ खास श्रेणियों को इससे बाहर रखा गया है। निम्नलिखित दवाओं के आयात के लिए पहले की तरह ही प्री-लाइसेंस (Regulatory License) की आवश्यकता अनिवार्य बनी रहेगी:
- सेक्स हार्मोन (Sex Hormones)
- साइटोटॉक्सिक दवाएं (Cytotoxic Drugs)
- बीटा-लैक्टम दवाएं (Beta-Lactam Antibiotics)
- जीवित सूक्ष्मजीवों वाले बायोलॉजिक्स (Biologics with live micro-organisms)
- नशीले और साइकोट्रोपिक पदार्थ (Narcotic and Psychotropic substances)
जनवरी 2026 के घरेलू नियमों का विस्तार
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने इससे पहले जनवरी 2026 में ‘नई दवाएं और क्लिनिकल ट्रायल नियम, 2019’ में संशोधन किया था, जिसके तहत घरेलू टेस्ट लाइसेंस के लिए ऐसी ही अधिसूचना (Notification) प्रणाली लागू की गई थी। अब इसी सफल मॉडल को विदेशों से होने वाले आयात के मामलों में भी विस्तार दिया जा रहा है।
फार्मा उद्योग और स्टार्टअप्स को क्या होगा फायदा?
अनुपालन का बोझ होगा कम: इस संशोधन से टेस्टिंग या आरएंडडी (R&D) के लिए कम मात्रा में दवाएं मंगाने वाले आवेदकों पर कागजी और प्रशासनिक कार्रवाई का बोझ काफी कम हो जाएगा।
तेजी से शुरू होगी टेस्टिंग: ऑनलाइन सूचना प्रणाली (Online Intimation System) हितधारकों के लिए एक त्वरित और आसान गेटवे का काम करेगी, जिससे देश के स्टार्टअप्स और स्थापित दवा उद्योगों को बिना किसी देरी के अपनी टेस्टिंग या एनालिसिस शुरू करने में मदद मिलेगी।
सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित
सरकार ने इस मसौदा अधिसूचना को सार्वजनिक कर दिया है ताकि सभी संबंधित हितधारकों से सलाह-मशविरा किया जा सके। यदि इस संबंध में किसी के पास कोई सुझाव या आपत्ति हो, तो उसे निम्नलिखित पते पर डाक द्वारा या ईमेल के माध्यम से भेजा जा सकता है:
- पता: अवर सचिव (औषधि), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, U-6, वर्क हॉल-C विंग, पहली मंजिल, कर्तव्य भवन-1, नई दिल्ली – 110001
- ईमेल: drugsdiv-mohfw[at]gov[dot]in