​“फर्नीचर एक्सप्रेस” से जोधपुर के निर्यातकों को मिला बड़ा संबल: 36 रेलगाड़ियों से 2,100 से अधिक कंटेनरों की हुई ढुलाई

​जयपुर / जोधपुर/ नरेश गुनानी/राजस्थान के हस्तशिल्प और फर्नीचर निर्यात को वैश्विक बाजार में नई गति देने के उद्देश्य से शुरू की गई “फर्नीचर एक्सप्रेस” रेल सेवा जोधपुर और आसपास के निर्यातकों के लिए वरदान साबित हो रही है। दी राजस्थान लघु उद्योग निगम लिमिटेड (राजसिको) और मैसर्स दून लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त प्रयासों से संचालित इस समर्पित रेल सेवा के माध्यम से अब तक 36 रेलगाड़ियों द्वारा 2,100 से अधिक टी.ई.यू. (Twenty-foot Equivalent Unit) कंटेनरों का सुरक्षित व त्वरित परिवहन किया जा चुका है। निर्यातकों की बढ़ती मांग को देखते हुए वर्तमान में प्रत्येक सप्ताह 2 से 3 रेल रेक का नियमित संचालन किया जा रहा है।

​आईसीडी जोधपुर का पुनरुद्धार और सेवा का विस्तार

​राजसिको के सतत प्रयासों के तहत अक्टूबर 2025 में माल प्रबंधन, परिवहन सेवा प्रदाता और व्यवसाय संवर्धक की नियुक्ति कर अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आई.सी.डी.) जोधपुर को पुनः पूरी तरह सक्रिय किया गया था। शुरुआत में सीमित कंटेनरों के साथ शुरू हुई इस पहल ने 28 फरवरी 2026 को “फर्नीचर एक्सप्रेस” के रूप में एक औपचारिक और समर्पित रूप लिया। यह विशेष रेल सेवा जोधपुर आईसीडी से गुजरात स्थित मुंद्रा बंदरगाह तक सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करती है, जिससे निर्यातकों को समयबद्ध और प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक्स समाधान मिल रहा है।

​स्थानीय स्तर पर खाली कंटेनरों की सुलभ उपलब्धता

​इस व्यवस्था का सबसे बड़ा व्यावसायिक लाभ यह रहा है कि निर्यातकों को अब खाली कंटेनरों के लिए दूर-दराज के शहरों या अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

  • ​शिपिंग कंपनियों की मौजूदगी: एम.एस.सी. (MSC), ओ.ओ.सी.एल. (OOCL), हापाग-लॉयड और जे. एम. बक्शी समूह जैसी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लाइनों के खाली कंटेनर अब सीधे आईसीडी जोधपुर में ही उपलब्ध हो रहे हैं।
  • ​लागत और समय की बचत: पहले खाली कंटेनर मंगाने में होने वाली देरी और अतिरिक्त परिवहन खर्च अब समाप्त हो गया है।
  • ​बेहतर निर्यात योजना: समय पर खाली कंटेनर मिलने से निर्यातक अपने उत्पादों की स्टफिंग (पैकिंग) और शिपिंग शेड्यूल की योजना पहले से अधिक सटीक और प्रभावी ढंग से बना पा रहे हैं।

​’सिंगल विंडो’ एकीकृत लॉजिस्टिक्स सुविधा

​राजसिको आईसीडी जोधपुर अब निर्यातकों के लिए ‘वन-स्टॉप’ लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। यहाँ खाली कंटेनरों की उपलब्धता से लेकर मुंद्रा पोर्ट तक नियमित रेल रवानगी की पूरी श्रृंखला एक ही छत के नीचे उपलब्ध है।

  • ​सड़क परिवहन से मुक्ति: रेल सेवा पर निर्भरता बढ़ने से सड़क परिवहन से होने वाले जोखिम, प्रदूषण और अत्यधिक भाड़े में भारी कमी आई है।
  • ​प्रतिस्पर्धी दरें: विशेष रूप से 40 फीट हाई-क्यूब (40 HC) कंटेनरों के लिए निर्यातकों को बेहद प्रतिस्पर्धी और किफायती माल-भाड़ा दरें मिल रही हैं।
  • ​विविध विकल्प: विश्वस्तरीय शिपिंग साझेदारों के जुड़ने से स्थानीय कारोबारियों को अपनी सुविधा और गंतव्य के अनुसार शिपिंग लाइन चुनने की स्वतंत्रता मिली है।

​किन उद्योगों को मिल रहा है सीधा लाभ?

​यह पहल मुख्य रूप से जोधपुर और पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख निर्यातक क्षेत्रों के लिए लाभकारी सिद्ध हुई है:

  1. ​काष्ठ एवं धातु फर्नीचर उद्योग: वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय जोधपुर के हस्तनिर्मित व आधुनिक फर्नीचर का सुरक्षित व तेज निर्यात।
  2. ​हस्तशिल्प (Handicrafts): नाजुक व मूल्यवान हस्तशिल्प उत्पादों को बंदरगाह तक सुरक्षित पहुँचाना।
  3. ​ग्वार गम एवं कृषि उत्पाद: समयबद्ध शिपमेंट से अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों की समय पर पूर्ति।

​इस सुव्यवस्थित लॉजिस्टिक्स मॉडल से न केवल स्थानीय उद्योगों की कार्यकुशलता बढ़ी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में राजस्थान के उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता भी सुदृढ़ हुई है।

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