जयपुर | 11 अगस्त 2026/ गौरव कोचर/ राजस्थान वाणिज्यिक कर विभाग ने राज्य में फर्जी फर्मों के जरिए हो रही कर चोरी और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के अनुचित लाभ/दुरुपयोग के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। प्रदेशभर के सभी 16 जोनों ने मिलकर गत सोमवार सुबह 10:00 बजे से देर रात तक एक विशेष संयुक्त अभियान चलाया। इस दौरान कुल 137 संदिग्ध फर्मों के परिसरों और दस्तावेजों की सघन जांच की गई, जिसमें से 106 फर्में पूरी तरह फर्जी पाई गईं।
कार्रवाई का त्वरित सार-संक्षेप (At a Glance)
मुख्य बिंदु: 137 फर्मों की जांच में 106 फर्में बोगस पाई गईं। कुल ₹547.58 करोड़ का फर्जी कारोबार और ₹77.65 करोड़ का ITC संदेह के दायरे में है, जबकि ₹4.65 करोड़ की ITC राशि को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक कर दिया गया है।
विवरण
फर्जी फर्में (106)
वास्तविक/अनियमित फर्में (31)
कुल योग (137)
कुल कारोबार (Turnover)
₹547.58 करोड़
₹18.93 करोड़
₹566.51 करोड़
जांच के दायरे में ITC
₹77.65 करोड़
₹2.26 करोड़
₹79.91 करोड़
लेजर में उपलब्ध राशि
₹8.07 करोड़
₹77.45 लाख
₹8.84 करोड़
ब्लॉक की गई ITC राशि
₹4.65 करोड़
₹17.60 लाख
₹4.82
करोड़
फर्जी फर्मों का नेटवर्क: राज्य बनाम केंद्र क्षेत्राधिकार
जांच में सामने आई 106 फर्जी फर्मों में से 78 फर्में राज्य क्षेत्राधिकार और 28 फर्में केंद्र क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आती हैं:
- राज्य क्षेत्राधिकार (78 फर्में):
- कुल कारोबार: ₹46,000.59 लाख (लगभग ₹460.01 करोड़)
- संदिग्ध ITC: ₹6,027.98 लाख (लगभग ₹60.28 करोड़)
- केंद्र क्षेत्राधिकार (28 फर्में):
- कुल कारोबार: ₹8,757.82 लाख (लगभग ₹87.58 करोड़)
- संदिग्ध ITC: ₹1,737.04 लाख (लगभग ₹17.37 करोड़)
31 वास्तविक फर्मों में भी मिलीं गंभीर अनियमितताएं
अभियान के दौरान जांच की गई 31 वास्तविक फर्मों में भी कर नियमावलियों के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं:
- कारोबार एवं ITC का दायरा: इन फर्मों का कुल कारोबार ₹18.93 करोड़ और संदिग्ध ITC ₹2.26 करोड़ पाया गया।
- त्वरित कार्रवाई: इनके उपलब्ध ITC लेजर (₹77.45 लाख) में से ₹17.60 लाख की ITC राशि को तुरंत ब्लॉक कर दिया गया है।
- क्षेत्राधिकार विभाजन: इनमें 25 फर्में राज्य क्षेत्राधिकार (कारोबार ₹12.51 करोड़) तथा 6 फर्में केंद्र क्षेत्राधिकार (कारोबार ₹6.42 करोड़) से संबंधित हैं।
विभाग की कार्यप्रणाली और सख्त चेतावनी
वाणिज्यिक कर विभाग की इस कार्रवाई का मुख्य आधार उन्नत डेटा एनालिटिक्स और तकनीकी टूल्स रहे। विभाग द्वारा निम्नलिखित गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है:
- बिना किसी वास्तविक वस्तु या सेवा की आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस (Bill) जारी करना।
- अपात्र या फर्जी ITC का लाभ उठाना और उसे आगे अन्य फर्मों को ट्रांसफर करना।
- फर्जी पहचान और दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन (Registration) प्राप्त करना।
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईमानदार करदाताओं के हितों की रक्षा करना और कर चोरी के पूरे सिंडिकेट पर प्रभावी रोक लगाना है। उपलब्ध साक्ष्यों एवं जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी फर्मों एवं उनके संचालकों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।