| नरेश गुनानी
जयपुर | 25 दिसंबर 2025
राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जी डिग्री और दस्तावेजों का सहारा लेने वाले गिरोहों के खिलाफ राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने बड़ी घेराबंदी कर ली है। आयोग के आग्रह पर राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब प्रदेश के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के दस्तावेजों पर QR कोड अनिवार्य कर दिया गया है।
एक क्लिक पर उजागर होगी सच्चाई
RPSC सचिव के अनुसार, अब भर्ती संस्थानों को अभ्यर्थियों के दस्तावेजों के सत्यापन के लिए महीनों का इंतजार नहीं करना होगा। दस्तावेजों पर अंकित QR कोड को स्कैन करते ही अभ्यर्थी का पूरा रिकॉर्ड सीधे संबंधित विश्वविद्यालय के डेटाबेस से प्रदर्शित हो जाएगा। इससे न केवल चयन प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि फर्जीवाड़े की गुंजाइश भी खत्म हो जाएगी।
इन बदलावों से बदलेगी व्यवस्था
राज्य सरकार के उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा विभाग ने आयोग के सुझावों पर अमल करते हुए सभी विश्वविद्यालयों को निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
- अनिवार्य QR कोड: डिग्री, डिप्लोमा, मार्कशीट, प्रोविजनल सर्टिफिकेट और माइग्रेशन जैसे सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर अब QR कोड होगा।
- डिजिटल वेरिफिकेशन: स्कैनिंग के माध्यम से दस्तावेजों का मिलान तत्काल विश्वविद्यालय के मूल रिकॉर्ड से किया जा सकेगा।
- स्टैंडर्ड एनरोलमेंट सिस्टम: रिकॉर्ड में हेराफेरी रोकने के लिए अब सभी विश्वविद्यालयों में नामांकन (Enrollment) की एक मानक व्यवस्था लागू होगी। छात्रों को वर्षवार और क्रमवार एनरोलमेंट नंबर आवंटित किए जाएंगे।
- बैक डेट डिग्रियों पर रोक: अक्सर देखा गया है कि परीक्षा के बाद अभ्यर्थी बैक डेट में बनी फर्जी डिग्रियां पेश करते हैं। नई डिजिटल व्यवस्था से ऐसी डिग्रियों को पहचानना बेहद आसान हो जाएगा।
भर्ती प्रक्रिया में आएगी तेजी
आयोग सचिव ने स्पष्ट किया कि संदिग्ध दस्तावेजों की जांच में लगने वाला लंबा समय भर्ती प्रक्रिया में देरी का एक मुख्य कारण रहा है। सितंबर 2025 में जारी निर्देशों के बाद अब इस नई व्यवस्था से भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता के साथ-साथ विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। योग्य अभ्यर्थियों को समय पर नियुक्ति मिल सकेगी और जालसाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।