
| योगेश शर्मा
जयपुर। चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नित नए बदलावों और आधुनिक शोध से चिकित्सकों को रूबरू कराने के उद्देश्य से मानसरोवर स्थित प्रियंका हॉस्पिटल एंड कार्डियक सेंटर (PHCC) द्वारा क्रिसमस के पावन अवसर पर सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम ‘PHCC कनेक्ट 2025’ (CME) का भव्य आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक संगोष्ठी में जयपुर और आसपास के क्षेत्रों से 300 से अधिक अनुभवी चिकित्सकों ने शिरकत की।
नवीनतम उपचार पद्धतियों पर विशेषज्ञों का मंथन
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न चिकित्सा विषयों पर विशेषज्ञों ने अपनी केस स्टडीज और रिसर्च साझा की। सत्र के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित रहे:
- स्टेमी प्रबंधन 2025 (STEMI Management): राजस्थान के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जी.एल. शर्मा ने हार्ट अटैक (स्टेमी) की स्थिति में तत्काल और आधुनिक प्रबंधन पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि 2025 की नई गाइडलाइन्स के अनुसार कैसे समय रहते मरीज की जान बचाई जा सकती है।
- एंटीप्लेटलेट प्रबंधन: हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष जोशी ने ‘पोस्ट पीसीआई’ (एंजीयोप्लास्टी के बाद) रोगियों में एंटीप्लेटलेट दवाओं के सही संतुलन और प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी।
- स्त्री रोग विज्ञान में नवाचार: स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आशा शर्मा ने ‘रेलुगोलिक्स संयोजन थेरेपी’ के माध्यम से गर्भाशय फाइब्रॉएड से जुड़े भारी मासिक रक्तस्राव (HMB) के इलाज में इसके प्रभावी रोल पर प्रकाश डाला।
बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की ओर एक कदम
प्रियंका हॉस्पिटल एंड कार्डियक सेंटर के चेयरमैन और प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जी.एल. शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा:
”चिकित्सा विज्ञान निरंतर बदल रहा है। ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सकों को अपडेट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब डॉक्टर नवीनतम तकनीकों से लैस होते हैं, तभी हम समाज को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं।”
दिग्गज चिकित्सकों की गरिमामयी उपस्थिति
इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में शहर के कई नामचीन चिकित्सकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें मुख्य रूप से डॉ. मनीष मुंजाल, डॉ. अशोक गर्ग, डॉ. रोहित सिंह, डॉ. गणपत देवपुरा, डॉ. असवनी बिलंदी, डॉ. निखिल खंडेलवाल, डॉ. नवीन गुप्ता, डॉ. हिमांशु शर्मा, डॉ. प्रियंका पारासर, डॉ. नम्रता जैन, डॉ. मुस्कान जैन और डॉ. आयुषी शर्मा शामिल रहे।
सभी प्रतिभागी चिकित्सकों ने इस CME कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि उपचार की गुणवत्ता में सुधार के लिए निरंतर अध्ययन और अनुभव साझा करना अनिवार्य है।

