प्रशिक्षण कार्यक्रमों से राजस्थान में मत्स्य पालन को मिल रहा बढ़ावा: गजेन्द्र सिंह खींवसर

प्रशिक्षण कार्यक्रमों से राजस्थान में मत्स्य पालन को मिल रहा बढ़ावा: गजेन्द्र सिंह खींवसर

| नरेश गुनानी

जयपुर, 12 फरवरी। राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने गुरुवार को विधानसभा में प्रदेश के मत्स्य पालन क्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार मत्स्य कृषकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही है, ताकि उन्हें मत्स्य पालन के आधुनिक लाभों और तकनीकों से अवगत कराया जा सके।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का प्रभाव

​खींवसर ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत कृषकों को वित्तीय अनुदान प्रदान कर उन्हें सीधे तौर पर लाभान्वित किया जा रहा है, जिससे मत्स्य उत्पादन में वृद्धि हो सके। विशेष रूप से भीलवाड़ा जिले का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वहां मत्स्य पालन को प्रोत्साहन देने के लिए सभी श्रेणियों के जलाशयों का मत्स्याखेट ठेका (टेंडर) दिया जाता है।

टेंडर प्रक्रिया और श्रेणियों का वर्गीकरण

​प्रश्नकाल के दौरान गोपीचन्द मीणा द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए मंत्री ने जलाशयों के टेंडर की श्रेणीवार प्रक्रिया स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि जलाशयों को उनकी आय क्षमता के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है:

  • “क” श्रेणी: 5 लाख रुपये से अधिक की राशि वाले टेंडर (अब मत्स्य विभाग, जयपुर द्वारा)।
  • “ख” श्रेणी: 50 हजार से 5 लाख रुपये तक के टेंडर (अब मत्स्य विभाग, जयपुर द्वारा)।
  • “ग” एवं “घ” श्रेणी: 10 हजार से 50 हजार रुपये तक के टेंडर, जो पंचायत समितियों के माध्यम से किए जाते हैं।

​मंत्री ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव की जानकारी देते हुए बताया कि अब पारदर्शिता बढ़ाने के लिए “क” और “ख” दोनों श्रेणियों के टेंडर मत्स्य विभाग, जयपुर के माध्यम से ही निष्पादित किए जाएंगे।

अनियमितताओं की होगी जांच

​भीलवाड़ा जिले में पिछले शासनकाल के दौरान मत्स्य पालन क्षेत्र में हुई शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए गजेन्द्र सिंह खींवसर ने सदन को आश्वस्त किया कि विगत सरकार के कार्यकाल में हुई किसी भी प्रकार की अनियमितताओं की विस्तृत जांच करवाई जाएगी।

​इससे पूर्व, विधायक मीणा के मूल प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्री ने वर्ष 2018 से 2025 तक की निविदा प्राप्तकर्ता फर्मों और संबंधित राशि का पूरा विवरण सदन के पटल पर रखा।

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