प्रशासनिक चूक से आहत संत शरणानंद महाराज पुष्कर से विदा:

हेलीपैड पर मची अफरा-तफरी, विदाई में दिखी भारी नाराजगी

(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर/अजमेर | 14 मार्च, 2026 तीर्थराज पुष्कर की पावन धरा पर चल रहे 43 दिवसीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ में शामिल होने आए रमणरेती आश्रम-मथुरा के संस्थापक एवं प्रख्यात संत गुरु शरणानंद महाराज शुक्रवार को भारी मन और नाराजगी के साथ विदा हो गए। आस्था के इस संगम में प्रशासनिक तालमेल की कमी और सुरक्षा व्यवस्थाओं में भारी चूक के चलते महाराज का प्रवास कड़वे अनुभवों के बीच संपन्न हुआ।

हेलीपैड पर सुरक्षा की धज्जियाँ: सेल्फी और हाथापाई का तमाशा

​घटनाक्रम की शुरुआत गुरुवार शाम को हुई, जब महाराज हेलीकॉप्टर से पुष्कर पहुंचे। वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार:

  • सुरक्षा का अभाव: हेलीपैड पर पुलिस और प्रशासन के पुख्ता इंतजाम नहीं थे, जिसके कारण भीड़ बेकाबू हो गई।
  • मर्यादा का उल्लंघन: लोग नियमों को ताक पर रखकर हेलीकॉप्टर के बेहद करीब पहुंच गए और फोटो-सेल्फी लेने के लिए होड़ मच गई।
  • विवाद और हाथापाई: स्वागत की आड़ में मची इस अफरा-तफरी के बीच तीर्थ पुरोहितों और अनुयायियों के बीच हल्की हाथापाई तक की नौबत आ गई।

​इस अव्यवस्था को देखकर महाराज ने गहरा असंतोष व्यक्त किया। सूत्रों की मानें तो उन्होंने उच्च स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही की लिखित या मौखिक शिकायत भी दर्ज कराई है।

प्रवास का विवरण: रिसॉर्ट से शिष्य के बंगले तक

​गुरु शरणानंद महाराज ने पुष्कर में केवल एक रात्रि विश्राम किया। उनके प्रवास का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार रहा:

  • रात्रि भोज: उन्होंने अपने एक निकटतम शिष्य के निजी बंगले पर रात्रि भोज किया।
  • विश्राम: रात्रि विश्राम के लिए वे सूरजकुंड स्थित एक निजी रिसॉर्ट पहुंचे।
  • प्रस्थान: शुक्रवार दोपहर करीब 1.15 बजे वे हेलीकॉप्टर के जरिए गोकुल-मथुरा के लिए रवाना हो गए।

देर से जागा प्रशासन: प्रस्थान के समय कड़ी सुरक्षा

​गुरुवार की चूक से सबक लेते हुए शुक्रवार को महाराज की रवानगी के समय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।

  • ​हेलीपैड को चारों तरफ से सुरक्षा घेरे में ले लिया गया।
  • ​केवल चुनिंदा प्रबुद्धजनों और अधिकृत व्यक्तियों को ही हेलीपैड के भीतर प्रवेश की अनुमति दी गई।

विदाई देने पहुंचे प्रबुद्धजन

​महाराज को विदाई देने के लिए हरिसेवा धाम भीलवाड़ा के महामंडलेश्वर हंसाराम उदासीन, राम बाबू दुसाद, कन्हैयालाल और जगदीश कुर्डिया प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। संतों और अनुयायियों ने नम आंखों से उन्हें विदा किया, लेकिन प्रशासनिक अव्यवस्था की चर्चा पूरे क्षेत्र में बनी रही।

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