प्रशांत किशोर का तीखा वार: “अरविंद केजरीवाल गेस पेपर पढ़ने वाले नेता हैं, हम टेक्स्ट बुक पढ़ने वाले”
सत्ता सम्मेलन में बोले PK – बिहार की गरीबी मिटानी है तो शिक्षा, भूमि सुधार और पूंजी जरूरी
रिपोर्ट: अवधेश बामल / रंजीत मेहरा
Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 11,2025
नई दिल्ली/पटना | 11 जुलाई 2025
टीवी 9 भारतवर्ष के सत्ता सम्मेलन में राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने अरविंद केजरीवाल से अपनी तुलना को लेकर एक दिलचस्प बयान देते हुए कहा कि केजरीवाल गेस पेपर पढ़ने वाले नेता हैं, जबकि वे खुद टेक्स्ट बुक पढ़ने वाले नेता हैं।
केजरीवाल बनाम PK: शिक्षा पर तारीफ, राजनीति पर फर्क
अरविंद केजरीवाल से तुलना किए जाने पर प्रशांत किशोर ने कहा –
“जो अच्छे विद्यार्थी होते हैं, वो जानते हैं कि टेक्स्ट बुक और गेस पेपर पढ़ने वाले विद्यार्थियों में कितना फर्क होता है। अरविंद केजरीवाल गेस पेपर पढ़ने वाले नेता हैं। हम टेक्स्ट बुक पढ़ने वाले नेता हैं।”
हालांकि उन्होंने दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि पिछले 15 सालों में दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने स्वीकार किया कि बिहार के मुकाबले दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था 200 गुना बेहतर है।

तो फिर हार क्यों हुई?
इस सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा –
“लोगों ने शिक्षा के लिए वोट जरूर दिया, लेकिन अब जनता उससे आगे की अपेक्षा करती है। केवल एक सेक्टर में सुधार से लंबी राजनीति नहीं चलती।”
“मैं आंदोलनकारी नहीं हूं”
क्या जनसुराज और आम आदमी पार्टी की राजनीति एक जैसी है? इस सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि –
“अरविंद केजरीवाल आंदोलनकारी हैं। मैं आंदोलनकारी नहीं हूं। किसी समाज का निर्माण आंदोलन से नहीं हुआ है। फ्रांसीसी क्रांति एक अपवाद हो सकती है, लेकिन समाज स्थायी सुधारों से बनता है।”
भूमि सुधार और आर्थिक विषमता पर बड़ा बयान
बिहार की गरीबी और असमानता पर बोलते हुए किशोर ने कहा –
“बिहार में 30-35 साल से सामाजिक न्याय और समाजवाद की राजनीति चल रही है, लेकिन आज भी यहां 57% लोग भूमिहीन हैं, जबकि देश में यह आंकड़ा 38% है।”
उन्होंने सवाल उठाया कि –
“जब तक बिहार में शिक्षा बेहतर नहीं होगी, भूमि सुधार नहीं होंगे और लोगों के हाथ में पूंजी नहीं होगी, तब तक गरीबी नहीं मिटेगी।”
आर्थिक सच्चाई: 80% लोग 100 रुपये रोज से कम पर जीवित
किशोर ने बिहार की आर्थिक स्थिति पर चिंताजनक आंकड़े साझा करते हुए कहा कि –
“यहां 80 फीसदी लोग रोजाना 100 रुपए से भी कम पर जीवित हैं। जिनके पास थोड़ी-बहुत बचत है, उन्हें बैंक लोन नहीं दे रहे। ऐसे में बिजनेस कैसे बढ़ेगा?”
तीन एजेंडे पर फोकस: शिक्षा, भूमि और पूंजी
प्रशांत किशोर ने कहा कि जनसुराज का एजेंडा साफ है –
- शिक्षा व्यवस्था में सुधार
- भूमि सुधार लागू करना
- लोगों के हाथ में पूंजी लाना
उन्होंने कहा –
“बदलाव तभी आएगा, जब जनता इन मुद्दों पर वोट देगी। जब वोट शिक्षा, ज़मीन और रोजगार पर होगा, तभी बिहार बदलेगा।”
प्रशांत किशोर का यह संबोधन बिहार की राजनीति को एक नई दिशा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। जहां वे केजरीवाल की नकल नहीं, बल्कि अपने रास्ते पर चलने की बात कर रहे हैं, वहीं बिहार की जमीनी हकीकत को सामने रखकर एक गंभीर एजेंडा भी पेश कर रहे हैं।