लोकेंद्र सिंह शेखावत
जयपुर, 28 मई। राजस्थान सरकार किसानों के कल्याण और उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। बदलते मौसम, ओलावृष्टि, चक्रवाती तूफान और फसल कटाई के बाद 14 दिनों तक खेत में सूखने के लिए रखी फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ (PMFBY) किसानों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हो रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने एक बेहद संवेदनशील और बड़ा निर्णय लेते हुए दिवंगत किसानों के लंबित पड़े फसल बीमा दावों के निपटारे को बेहद सरल बना दिया है।
जटिल प्रक्रियाओं से मिली मुक्ति, अब नहीं काटना होगा अदालतों का चक्कर
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि पुरानी गाइडलाइन के अनुसार, यदि किसी बीमित किसान की मृत्यु हो जाती थी, तो उनके परिजनों को बीमा क्लेम राशि हासिल करने के लिए अदालत से ‘उत्तराधिकार प्रमाण पत्र’ (सक्सेशन सर्टिफिकेट) लाना अनिवार्य था। कोर्ट से यह प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया इतनी जटिल और लंबी थी कि कई बार क्लेम की राशि कम होने पर किसान परिवार परेशान होकर क्लेम छोड़ देते थे। किसानों की इस व्यावहारिक समस्या को देखते हुए विभाग ने अधिसूचित बीमा कंपनियों को नियमों में ढील देकर त्वरित निस्तारण के निर्देश जारी किए हैं। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के हजारों किसान परिवारों को समय पर उनका हक मिल सकेगा।
क्लेम भुगतान के लिए ये तीन आसान रास्ते किए गए तय:
- नामांकन (नॉमिनेशन) होने पर: यदि बीमित किसान ने राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर अपने किसी पारिवारिक सदस्य को नामांकित (नॉमिनेट) किया है, तो बीमा कंपनी बिना किसी देरी के तुरंत उस नामांकित सदस्य को क्लेम राशि का भुगतान करेगी।
- नामांकन न होने पर (वारिसनामा के जरिए): यदि पोर्टल पर नॉमिनेशन दर्ज नहीं है, तो दिवंगत किसान के लंबित क्लेम का भुगतान अदालत के प्रमाण पत्र के अलावा, संबंधित तहसीलदार या पटवारी द्वारा जारी ‘वारिसनामा’ के आधार पर भी किया जा सकेगा।
- पारिवारिक सहमति से (सबसे आसान तरीका): जिन मामलों में परिवार में कोई विवाद नहीं है, वहां उत्तराधिकार प्रमाण पत्र या वारिसनामा की भी जरूरत नहीं होगी। परिवार के सभी सदस्य मिलकर 50 रुपये के नोटरी स्टांप पर एक शपथ पत्र दे सकते हैं, जिसमें वे किसी एक सदस्य को क्लेम राशि प्राप्त करने के लिए अधिकृत करेंगे। बीमा कंपनी सीधे उस अधिकृत सदस्य के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर कर देगी।
भुगतान के लिए अब केवल इन दस्तावेजों की होगी आवश्यकता:
प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने के लिए कृषि विभाग ने दस्तावेजों की सूची भी बेहद सीमित कर दी है। अब पीड़ित परिवार को केवल निम्नलिखित दस्तावेज देने होंगे:
-
- किसान का मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)
- परिवार के सदस्यों का सहमति शपथ पत्र (₹50 के नोटरी स्टांप पर)
- क्लेम प्राप्त करने वाले सदस्य के बैंक खाते की पासबुक की प्रति या कैंसिल्ड चेक
- [आधार कार्ड की प्रति]
कृषि विभाग का सख्त रुख: कृषि विभाग ने सभी बीमा कंपनियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि दिवंगत किसानों से जुड़े इन मामलों को पूरी मानवीय संवेदनशीलता के साथ देखा जाए। इन लंबित क्लेमों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए ताकि प्रभावित परिवारों को संकट के समय तुरंत आर्थिक संबल मिल सके।
गौरतलब है कि नियमों की जटिलता के कारण लंबे समय से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करोड़ों रुपयों के क्लेम अटके पड़े थे। राज्य सरकार के इस सरलीकरण के बाद अब इन मामलों का तुरंत निस्तारण हो सकेगा और वास्तविक हकदारों को लाभ मिलेगा। राजस्थान सरकार की इस अनूठी और संवेदनशील पहल की भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने भी सराहना की है।