प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के क्रियान्वयन में कोई कोर कसर नहीं छोड़ने के निर्देश, अतिरिक्त निदेशक ने अधिकारियों को दिए दिशा-निर्देश
नरेश गुनानी • वरिष्ठ संपादक
14 अक्टूबर 2025, 12:36 PM, जयपुर।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त निदेशक केसर लाल मीणा ने अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्रामों में आधारभूत अवसंरचना के विकास के लिए भारत सरकार की “प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना” (पी.एम.ए.जी.वाई.) के राज्य स्तरीय क्रियान्वयन की समीक्षा की। यह समीक्षा जिला परिषदों के माध्यम से योजना के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए की गई।
अतिरिक्त निदेशक ने मंगलवार को मुख्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अधिकारियों से संवाद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना सरकार की महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। उन्होंने सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि पात्र व्यक्तियों को योजना से लाभान्वित करने में कोई कोर कसर न छोड़ी जाए।
बैठक में संबल ग्राम योजना, बाबा साहब आंबेडकर आदर्श ग्राम योजना, ग्रामीण सेवा शिविर, शहरी सेवा शिविर, छात्रवृति प्रकरण, पालनहार योजना और कन्यादान योजना सहित कई प्रमुख योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई।
विशेष निर्देशों में शामिल हैं:
- प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत जिला परिषद स्तर पर एस.एन.ए. खाते में उपलब्ध राशि का पूर्ण उपयोग करना और शेष उपयोगिता प्रमाण-पत्र भिजवाना।
- पी.एम.ए.जी.वाई. अंतर्गत नव चयनित ग्रामों की ड्राफ्ट ग्राम विकास योजना (वी.डी.पी.) तैयार करना और अनुमोदन उपरांत फाइनल या अद्यतित वी.डी.पी. को पी.एम.ए.जी.वाई. पोर्टल पर अपलोड करना।
- अप्रारम्भ और प्रगतिरत कार्यों को शीघ्र पूर्ण कर कार्यों की प्रगति पोर्टल पर अपडेट करना।
- चयनित ग्रामों में से 70 या उससे अधिक अर्जित विलेज स्कोर वाले ग्रामों को “आदर्श ग्राम” घोषित करने का प्रस्ताव पी.एम.ए.जी.वाई. पोर्टल के माध्यम से विभाग को भेजना।
- योजना की समयबद्ध प्रगति और प्रभावी मॉनिटरिंग हेतु ग्राम जिला कलक्टर की अध्यक्षता में पी.एम.ए.जी.वाई. जिला अभिसरण समिति की नियमित बैठकें आयोजित करना।
बैठक में अतिरिक्त निदेशक एस.आर. मीणा ने भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। डूंगरपुर जिले के अतिरिक्त सभी जिलों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी या उनके प्रतिनिधि, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सभी जिलाधिकारी, अधिशाषी अभियंता, जिला परिषद (ग्रा.वि.प्र.), संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी, जिला परिषदों में योजना से संबंधित कार्मिक और लेखा कार्मिक ऑनलाइन बैठक में शामिल हुए।
अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे योजना के हर स्तर पर निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करें, ताकि अनुसूचित जाति बाहुल्य ग्रामों का विकास पूरी तरह से प्रभावी और समग्र रूप से हो सके।