जयपुर/ नरेश गुनानी/राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य सड़कों पर बढ़ रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस फॉलोअप बैठक में सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और सभी संबंधित विभागों को आपस में बेहतर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर पूर्व में हुई दुर्घटनाओं की ऑडिट रिपोर्ट और सुरक्षा उपायों का विस्तृत पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) दिया। वहीं, परिवहन विभाग ने भी प्रदेश में चलाए जा रहे सघन अभियानों की जानकारी साझा की।
बड़े स्तर पर हुई कार्रवाई: लाखों वाहनों के कटे चालान
बैठक में पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के आंकड़े पेश किए गए:
- परिवहन विभाग की कार्रवाई (सघन अभियान के तहत): विभिन्न अनियमितताओं के लिए 17,850 चालान काटे गए, 487 वाहनों को जब्त किया गया और 22 वाहनों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) निलंबित किए गए।
- पुलिस विभाग की कार्रवाई: यातायात नियमों की अनदेखी करने पर कुल 2,71,494 वाहनों के चालान किए गए।
हेल्पलाइन एकीकरण और ब्लैक स्पॉट सुधार के निर्देश
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने हादसों के बाद घायलों को तुरंत इलाज मुहैया कराने और सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए:
त्वरित एम्बुलेंस सेवा: एनएचएआई की हेल्पलाइन 1033, राज्य सरकार की आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा 108 और पुलिस हेल्पलाइन 112 के बीच प्रभावी तालमेल बिठाया जाए ताकि दुर्घटना की स्थिति में बिना वक्त गंवाए तुरंत चिकित्सा सहायता पहुंचे।
- ब्लैक स्पॉट का उपचार: हाईवे पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द ठीक किया जाए।
- हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर: एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) को प्रभावी ढंग से चलाया जाए, सड़कों के किनारे चिकित्सा व ट्रॉमा सुविधाएं सुचारू रखी जाएं।
- अतिक्रमण और चोरी पर लगाम: राजमार्गों के किनारे से अवैध कब्जे हटाए जाएं और हाईवे की संपत्तियों व उपकरणों की चोरी पर सख्ती से रोक लगे।
- मानकों का पालन: गति सीमा बोर्ड, संकेतक (साइनबोर्ड) और ऑब्जेक्ट हैजर्ड मार्किंग को तय मापदंडों के अनुसार लगाया जाए। दूसरे राज्यों के नंबर वाले वाहनों से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों पर भी पैनी नजर रखी जाए।
प्रशासनिक स्तर पर मॉनिटरिंग और फंड का सही इस्तेमाल
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि हर जिले में ‘जिला सड़क सुरक्षा समिति’ की बैठक नियमित रूप से हो। साथ ही, सड़क सुरक्षा के लिए आवंटित बजट (फंड) का सभी जिलों द्वारा शत-प्रतिशत और सही उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
- प्रवीण गुप्ता (अतिरिक्त मुख्य सचिव, PWD): उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सभी विभागों को मिलकर ग्राउंड लेवल पर प्रभावी मॉनिटरिंग करनी होगी। एनएचएआई को सड़कों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए जो भी प्रशासनिक या वित्तीय सहयोग चाहिए, वह राज्य सरकार द्वारा पूरा दिया जाएगा।
- भवानी सिंह देथा (प्रमुख शासन सचिव, परिवहन विभाग व अध्यक्ष, RSRTC): उन्होंने सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर जोर दिया और कहा कि सभी स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) से चर्चा कर एक व्यावहारिक कार्ययोजना बनाकर काम किया जा रहा है।
- संतोष यादव (अध्यक्ष, NHAI): उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़कर बताया कि एनएचएआई सड़कों की इंजीनियरिंग में सुधार, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली (Emergency Response System) और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहा है।
बैठक में यह अधिकारी रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर ए. सावंत, यूडीएच विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक गुप्ता, महानिदेशक (यातायात) मालिनी अग्रवाल, स्वायत्त शासन विभाग के सचिव रवि जैन, श्रम विभाग के सचिव पूर्णा चंद्र किशन सहित कई आला अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे। इसके अलावा, तकनीकी माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस बैठक से जुड़े।