प्रदेश में विलायती बबूल का प्रभावी उन्मूलन आवश्यक – पंचायती राज मंत्री
जयपुर, 28 अगस्त। सुनील शर्मा। टेलीग्राफ टाइम्स
पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विलायती बबूल (प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा) को जड़ सहित हटाने के लिए विस्तृत अध्ययन कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने कहा कि इसके उन्मूलन के संबंध में ऐसे विकल्प तलाशे जाएं जिनके माध्यम से इस दिशा में सुरक्षित और प्रभावी तरीके से कार्य किया जा सके। दिलावर ने स्पष्ट किया कि विलायती बबूल को हटाने का कार्य चरणबद्ध रूप से किया जाए और इसके लिए क्षेत्र भी चिन्हित किए जाएं।

मंगलवार को पंचायती राज सभागार में आयोजित बैठक में उन्होंने वन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। दिलावर ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल विलायती बबूल को काटना नहीं, बल्कि इसकी जड़ों को भी पूरी तरह से नष्ट करना है ताकि यह दोबारा न उग सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यह पेड़ प्रदेश में बड़े खतरे के रूप में सामने आ रहा है।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश में तेजी से फैल रहा विलायती बबूल अपने आसपास किसी भी अन्य वनस्पति को पनपने नहीं देता। इसके कारण न केवल खेती की मिट्टी अनुपजाऊ हो रही है बल्कि चारागाह क्षेत्र भी नष्ट हो गए हैं। किसानों को पशु चराने में गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। एक पौधा उगने के बाद उसके आसपास कई पौधे स्वतः विकसित हो जाते हैं और दूसरी वनस्पतियों का विकास रुक जाता है।
उन्होंने विलायती बबूल के उन्मूलन के लिए उपलब्ध वैधानिक प्रावधानों और नीतियों की समीक्षा की और कहा कि सरकार अपने स्तर पर इसे हटाने का प्रयास कर रही है। कुछ तकनीकी और प्रक्रियागत बाधाएं हैं, जिन्हें दूर कर समाधान निकाला जाएगा। बैठक में इस पेड़ से जुड़े उत्पादों जैसे ईंधन, चारकोल और पशु आहार पर भी चर्चा की गई।
बैठक में पंचायती राज के शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगाराम, वाटरशेड निदेशक मोहम्मद जुनैद, कर्ण नारायण कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के कुलपति बलराज सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और इस क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

