प्रदेश के मंदिरों का होगा कायाकल्प, विकास कार्यों के लिए सरकार प्रतिबद्ध: देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत
| नरेश गुनानी
जयपुर, 3 फरवरी 2026। राजस्थान के देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने मंगलवार को विधानसभा में प्रदेश के धार्मिक स्थलों के संरक्षण को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ट की। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार प्रदेशभर के मंदिरों के जीर्णोद्धार और विकास कार्यों के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
पूर्ववर्ती सरकार की घोषणाओं पर उठाए सवाल
प्रश्नकाल के दौरान विधायक चेतन पटेल कोलाना द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए देवस्थान मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार द्वारा चुनावी वर्ष में कई विकास कार्यों की केवल घोषणाएं की गई थीं। समीक्षा के दौरान इनमें से कई कार्य व्यावहारिक नहीं पाए गए, जिसके कारण उन्हें वर्तमान में क्रियान्वित करना संभव नहीं हो पा रहा है।
कोटा के प्रमुख मंदिरों के लिए स्वीकृतियां और बाधाएं
मंत्री ने बजट 2023-24 का हवाला देते हुए कोटा जिले के विशिष्ट मंदिरों की स्थिति स्पष्ट की:
- ठाकुर जी गोपालजी महाराज मंदिर (ढीपरी): यहाँ विकास कार्यों के लिए पर्यटन विकास कोष से 383.33 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे।
- प्राचीन शिव मंदिर (पीपल्दा समेल): इस मंदिर के लिए 248.14 लाख रुपए की स्वीकृति 13 जून 2023 को जारी हुई थी।
- चमलेश्वर महादेव मंदिर (ककरावदा): इस मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए कोई स्वीकृति जारी नहीं की गई थी।
उन्होंने बताया कि जून में स्वीकृति मिलने के बावजूद विधानसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण निविदाएं (Tenders) जारी नहीं हो सकीं। इसके पश्चात वित्त विभाग की तकनीकी आपत्तियों के कारण इन कार्यों को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
अराजकीय मंदिरों को लेकर स्पष्टीकरण
विधानसभा क्षेत्र पीपल्दा के मंदिरों के संबंध में जवाब देते हुए कुमावत ने बताया कि वहां के प्राचीन धार्मिक स्थल ‘अराजकीय’ श्रेणी में आते हैं। वर्तमान नियमों के अनुसार, अराजकीय मंदिरों को सीधे देवस्थान विभाग के नियंत्रण में लेने का कोई प्रावधान नहीं है। वर्तमान में कोटा जिले के केवल 24 धार्मिक स्थल ही देवस्थान विभाग द्वारा प्रबंधित और नियंत्रित हैं।
भविष्य की योजना: टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर फंड से होगा विकास
देवस्थान मंत्री ने भविष्य की योजना साझा करते हुए बताया कि सरकार राजस्थान टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेसिटी बिल्डिंग फण्ड के माध्यम से ऋण लेने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूर्ण होगी, मंदिरों के लंबित विकास कार्यों और जीर्णोद्धार के संबंध में सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

