प्रदेश की 63 हजार आंगनबाड़ियों में ‘PAM’ बैठक का आयोजन: बच्चों के पोषण और शिक्षा पर अभिभावकों संग हुआ सीधा संवाद

जयपुर, 14 जुलाई 2026/ मुस्कान तिवाड़ी/ महिला एवं बाल विकास विभाग की एक अनूठी और महत्वपूर्ण पहल के तहत मंगलवार को राजस्थान के सभी 63 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों पर ‘पैरेंट्स-आंगनबाड़ी मीटिंग’ (PAM) का सफल आयोजन किया गया। विभाग द्वारा हर माह अमावस्या के दिन आयोजित होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा में सुधार लाना है।

​पुरुष सहभागिता पर विशेष जोर: केवल माताएं ही नहीं, पिता और दादा भी पहुंचे

​आईसीडीएस (ICDS) निदेशक वासुदेव मालावत ने बताया कि इस मासिक बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले नौनिहालों के माता-पिता और अभिभावकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बैठक के दौरान बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास, उनके व्यवहार में आ रहे बदलावों, स्वास्थ्य, उचित पोषण और अनौपचारिक शिक्षा पर विस्तार से चर्चा की गई।

​इस बार की बैठक में एक खास बदलाव देखने को मिला—विभाग द्वारा परिवार के पुरुष सदस्यों जैसे पिता, दादा और चाचा को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। बच्चों की परवरिश और देखरेख में पुरुषों की जिम्मेदारी व सहभागिता बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

​अधिकारियों ने किया सघन निरीक्षण

​बैठक की महत्ता और उसकी प्रभावशीलता को बनाए रखने के लिए मुख्यालय स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक सख्त मॉनिटरिंग की गई। निदेशक के अनुसार, विभागीय निर्देशानुसार प्रदेश के सभी:

  • ​उप निदेशक (Deputy Directors)
  • ​बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPOs)
  • ​लेडी सुपरवाइजर (Lady Supervisors)

​इन सभी अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर ‘PAM’ बैठक का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं को परखा।

​आईसीडीएस निदेशक ने खुद मालवीय नगर केंद्र पर पहुंचकर लिया फीडबैक

​निरीक्षण की इसी कड़ी में आईसीडीएस निदेशक वासुदेव मालावत ने मंगलवार को स्वयं जयपुर परियोजना-2 के अंतर्गत आने वाले मालवीय नगर सेक्टर 10 आंगनबाड़ी केंद्र का औचक निरीक्षण किया।

​निरीक्षण के दौरान निदेशक ने क्या किया?

उन्होंने बैठक में मौजूद बच्चों के माता-पिता से सीधा संवाद किया। निदेशक ने अभिभावकों से पूछा कि आंगनबाड़ी आने के बाद बच्चों की गतिविधियों और उनके व्यवहार में क्या बदलाव आया है। साथ ही, उन्होंने बच्चों को मिलने वाले पोषाहार की गुणवत्ता और वितरण की जानकारी भी ली।

 

​निदेशक ने केंद्र पर तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे बच्चों के विकास की नियमित ट्रैकिंग करें और अभिभावकों के साथ लगातार संपर्क में रहें, ताकि कोई भी बच्चा कुपोषण या शिक्षा से वंचित न रहे।

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