लेह-लद्दाख में वासुदेव देवनानी ने की सिंधु नदी एवं भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना; प्रदेशवासियों को दी निर्जला एकादशी की शुभकामनाएं
जयपुर/लेह, 24 जून 2026 | प्रीति बालानी
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने लेह-लद्दाख में आयोजित प्रथम सिंधु कुंभ के अंतर्गत पवित्र सिंधु घाट पर मां सिंधु नदी एवं भगवान झूलेलाल जी की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस पावन अवसर पर उन्होंने देश, राजस्थान प्रदेश और पूरे समाज की सुख-समृद्धि, शांति तथा चहुंमुखी प्रगति की कामना की।
सिंधु नदी राष्ट्रीय अस्मिता की अमर प्रतीक
इस ऐतिहासिक अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए वासुदेव देवनानी ने कहा कि सिंधु नदी केवल एक जलधारा नहीं है, बल्कि यह हमारी भारतीय सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता की अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा:
”सिंधु के पावन तट पर श्रद्धा, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का जो अद्भुत संगम आज दिखाई दे रहा है, वह भारत की सनातन परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सशक्त परिचायक है।”
सिंधु दर्शन यात्रा के 30वें वर्ष में नया अध्याय
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि पिछले तीन दशकों से चली आ रही सिंधु दर्शन यात्रा अपने 30वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है और इस बार यह ‘प्रथम सिंधु कुंभ’ के रूप में एक नए और भव्य अध्याय की साक्षी बन रही है। 22 से 27 जून तक आयोजित होने वाले इस छह दिवसीय महाआयोजन में धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता से जुड़े कई विविध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जो भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत तथा सांस्कृतिक गौरव का भव्य प्रदर्शन कर रहे हैं।
लद्दाख की अलौकिक सुंदरता और राष्ट्रभावना का मिलन
देवनानी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि लद्दाख की अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता, यहाँ की ऐतिहासिक धरोहरें और राष्ट्रभावना से ओतप्रोत वातावरण इस पूरे आयोजन को और अधिक विशेष बनाता है। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं, पूज्य संत-महात्माओं और सामाजिक प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता भारत की विविधता में एकता के भाव को और अधिक सुदृढ़ कर रही है।
निर्जला एकादशी पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं
लेह-लद्दाख प्रवास के दौरान ही निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि निर्जला एकादशी भारतीय सनातन संस्कृति में श्रद्धा, संयम, तप और आत्मशुद्धि का एक बेहद महत्वपूर्ण पर्व है। यह व्रत और त्योहार हमें आत्मसंयम, सेवा, सदाचार और आध्यात्मिक उन्नयन का मार्ग दिखाता है। व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, आत्मनियंत्रण और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
देवनानी ने जल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पर्व हमें त्याग और परोपकार की भावना का स्मरण कराता है। हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं हमेशा से समाज को एकता, सद्भाव और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करती आई हैं। उन्होंने प्रार्थना की कि यह पावन पर्व सभी प्रदेशवासियों के जीवन में नई ऊर्जा, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली लेकर आए।