पेपर लीक पर सख्त कानून बनाए सरकार, युवाओं का भविष्य दांव पर: राजेंद्र सेन

योगेश शर्मा 

जयपुर। राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की निरंतर बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य एवं एआईसीसी (OBC विभाग) के पूर्व नेशनल कोऑर्डिनेटर राजेंद्र सेन ने सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने और परीक्षा प्रणाली को फुलप्रूफ बनाने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है जब सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय धरातल पर कठोर कानून लागू करने चाहिए।

युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ बंद हो

​राजेंद्र सेन ने जारी बयान में कहा कि बार-बार पेपर लीक होने की घटनाओं ने परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इससे न केवल प्रशासन और सरकार की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि प्रदेश के लाखों युवाओं का भविष्य अंधकार में डूब रहा है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी की मार झेल रहे युवाओं के लिए यह स्थिति “कोढ़ में खाज” के समान है।

मानसिक और आर्थिक चोट का मुद्दा

​सेन ने युवाओं के संघर्ष को रेखांकित करते हुए कहा:

​”एक अभ्यर्थी वर्षों तक सीमित संसाधनों के बीच दिन-रात मेहनत करता है। जब पेपर लीक या रद्द होता है, तो वह केवल एक परीक्षा का अंत नहीं होता, बल्कि उस युवा के मानसिक मनोबल और परिवार की आर्थिक कमर का टूटना भी होता है। कई बार निराशा इतनी गहरी हो जाती है कि युवाओं का मानसिक संतुलन तक बिगड़ जाता है।”

 

प्रमुख मांगें और सुझाव

​राजेंद्र सेन ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित बिंदुओं पर त्वरित कार्रवाई की मांग रखी है:

  • विशेष कठोर कानून: पेपर लीक माफिया और संगठित अपराधों पर लगाम लगाने के लिए एक ऐसा कानून बने जिसमें कठोर कारावास और संपत्ति कुर्क करने जैसे प्रावधान हों।
  • त्वरित न्याय (Fast-track Trials): दोषियों को सजा दिलाने के लिए विशेष अदालतों के माध्यम से त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जाए।
  • तकनीकी सुधार: परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक, बायोमेट्रिक सत्यापन और हाई-टेक निगरानी व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।
  • पारदर्शिता: भर्ती प्रक्रिया के हर चरण पर जवाबदेही तय हो ताकि भविष्य में सेंधमारी की कोई गुंजाइश न रहे।

सरकार की नैतिक जिम्मेदारी

​अंत में राजेंद्र सेन ने जोर देते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और एक निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करना किसी भी चुनी हुई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता और नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। यदि अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश का युवा खुद को ठगा हुआ महसूस करेगा, जिसका खामियाजा व्यवस्था को भुगतना होगा।

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