गौरव कोचर
कोलकाता/नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में हुई बढ़ोतरी ने देश का सियासी पारा गरमा दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष केंद्र सरकार को “जनता की जेब पर डाका” डालने के नाम पर घेर रहा है, वहीं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने विपक्ष के आरोपों पर तीखा पलटवार किया है।
विपक्ष का हमला: “आम आदमी की कमर टूटी”
विपक्षी दलों ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर सोशल मीडिया और सड़कों पर मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष का आरोप है कि ईरान-इजरायल युद्ध के बहाने सरकार तेल कंपनियों को मुनाफा कमाने की खुली छूट दे रही है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा, “चुनावी फायदे के लिए जो कीमतें रुकी हुई थीं, अब वे जनता की थाली से निवाला छीनने के लिए बढ़ा दी गई हैं।”
दिलीप घोष का बयान: “न्यूनतम बढ़ोतरी की गई”
विपक्ष के इन आरोपों पर पश्चिम बंगाल बीजेपी के कद्दावर नेता दिलीप घोष ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यह बढ़ोतरी अपरिहार्य थी, लेकिन सरकार ने इसे न्यूनतम रखने की कोशिश की है।
दिलीप घोष के बयान के मुख्य अंश:
- वैश्विक संकट का असर: घोष ने कहा, “जब दुनिया भर में युद्ध की स्थिति हो और कच्चे तेल के दाम $100 के पार चले जाएं, तो भारत अछूता नहीं रह सकता। विपक्ष को अर्थशास्त्र की समझ होनी चाहिए।”
- न्यूनतम वृद्धि: उन्होंने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुपात में भारत में बहुत कम बढ़ोतरी की गई है ताकि आम जनता पर बोझ कम से कम पड़े।
- विपक्ष पर तंज: दिलीप घोष ने विपक्षी राज्यों पर निशाना साधते हुए कहा, “जो लोग आज महंगाई पर चिल्ला रहे हैं, वे अपने राज्यों में वैट (VAT) कम करके जनता को राहत क्यों नहीं देते? दिल्ली में तंज कसना आसान है, लेकिन जिम्मेदारी निभाना मुश्किल।”
महंगाई का गणित और जनता की चिंता
वर्तमान में कच्चे तेल की कीमतों के कारण माल ढुलाई महंगी होने लगी है, जिसका सीधा असर फल, सब्जी और अन्य जरूरी सेवाओं पर पड़ रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में तेल कंपनियां कीमतों में और संशोधन कर सकती हैं।
सियासी मायने
दिलीप घोष का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में आगामी नगर निगम और उपचुनावों की तैयारी चल रही है। बीजेपी नेतृत्व इस मुद्दे पर रक्षात्मक होने के बजाय ‘ग्लोबल क्राइसिस’ और ‘राज्यों की जिम्मेदारी’ का कार्ड खेलकर विपक्ष को घेरने की रणनीति अपना रहा है।
बड़ी बातें:
- मुद्दा: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें और विपक्षी विरोध।
- बीजेपी का स्टैंड: वैश्विक युद्ध की स्थिति और न्यूनतम वृद्धि का तर्क।
- विपक्ष की मांग: टैक्स में कटौती और कीमतों पर तुरंत नियंत्रण।
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