जयपुर/ नरेश गुनानी/मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पेंशनर्स के प्रशासनिक अनुभव, त्वरित निर्णय लेने के कौशल और धरातल की समस्याओं को गहराई से समझने की क्षमता ‘विकसित राजस्थान’ के संकल्प को साकार करने में एक मजबूत आधार बन सकती है। सरकारी कर्मचारी या अधिकारी राजकीय सेवा से निवृत्त हो सकता है, लेकिन सामाजिक दायित्वों से कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। मुख्यमंत्री ने पेंशनर्स से अपील की कि वे अपने संचित ज्ञान और अमूल्य अनुभवों को युवा पीढ़ी के साथ निरंतर साझा करें।
मुख्यमंत्री राजस्थान पेंशनर समाज द्वारा आयोजित ‘सम्मान एवं आभार कार्यक्रम’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान आज विकास की जिन बुलंदियों पर खड़ा है, उसकी मजबूत नींव में पेंशनर समाज का पसीना, परिश्रम और दूरदर्शिता शामिल है। प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, कृषि, ग्रामीण विकास और जनसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान की अमिट छाप है और उनका जीवन अनुभव नई पीढ़ी के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।
वरिष्ठजनों के सम्मान, सुविधा और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कदम
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि राज्य सरकार पेंशनर्स को सम्मान, सामाजिक सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और आवश्यक सुविधाएं सुलभ कराने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है:
- ग्रेच्युटी सीमा में बढ़ोतरी: राज्य में ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये किया गया है।
- अतिरिक्त पेंशन भत्ता: 70 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले पेंशनर्स को 5 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन भत्ता दिया जा रहा है। यह लाभ न्यायिक सेवा के पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशनर्स के लिए भी समान रूप से लागू किया गया है।
- वेतन वृद्धि का लाभ: 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले राज्य कार्मिकों को 1 जुलाई की वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का लाभ सुनिश्चित किया गया है।
- पारिवारिक पेंशन सुरक्षा: कार्मिक की असमय मृत्यु की स्थिति में 10 वर्ष तक बढ़ी हुई पारिवारिक पेंशन देने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, पारिवारिक पेंशन की पात्रता के दायरे में विशेष योग्यजन भाई-बहन को भी सम्मिलित किया गया है।
डिजिटल व्यवस्था से घर बैठे मिल रहीं पेंशन सुविधाएं
पेंशन स्वीकृति और सत्यापन की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं आसान बनाने पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:
- पेंशन स्वीकृति से जुड़े नियमों को सरल बनाकर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू की गई है, जिससे सेवानिवृत्त कार्मिकों को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिली है।
- पीपीओ (PPO), जीपीओ (GPO) और सीपीओ (CPO) की स्वीकृतियां अब डिजिटल हस्ताक्षर से तुरंत जारी की जा रही हैं।
- घर बैठे जीवन प्रमाण-पत्र: सरकारी अधिकारी अपनी एसएसओ (SSO) आईडी से भी पेंशनर्स या पारिवारिक पेंशनर्स का जीवन प्रमाण-पत्र जारी कर सकते हैं। राज्य के 5 लाख से अधिक पेंशनर्स अब तक घर बैठे इस डिजिटल सुविधा का लाभ प्राप्त कर चुके हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार: आउटडोर सीमा में वृद्धि
पेंशनर्स के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने वित्तीय राहत बढ़ाई है:
- राज्य सरकार के पेंशनर्स के लिए आउटडोर चिकित्सा सुविधा व्यय की सीमा 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये प्रतिवर्ष कर दी गई है।
- राजकीय उपक्रमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं, बोर्डों, निगमों और विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स के लिए यह सीमा 20 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिवर्ष की गई है।
सेवारत कार्मिकों के हित में भी बड़े नीतिगत निर्णय
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार कार्यरत कर्मचारियों के कल्याण के लिए भी लगातार ठोस कदम उठा रही है:
- उच्च स्तरीय समिति का गठन: पदोन्नति एवं वेतनमान संबंधी विसंगतियों और मांगों के समाधान के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जा रही है, जो आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के बाद राज्य में उसके क्रियान्वयन को लेकर अपनी सिफारिशें सौंपेगी।
- पदोन्नति में राहत: पदोन्नति के लिए अनुभव की न्यूनतम समय सीमा में 2 वर्ष की छूट दी गई है। इसके अतिरिक्त, दिव्यांग कार्मिकों को वर्ष 2016 से पदोन्नति का लाभ प्रदान करने के लिए सेवा नियमों में संशोधन किया गया है।
- अनुकंपा नियुक्ति का दायरा बढ़ा: सेवाकाल के दौरान दिवंगत हुए राजकीय कार्मिकों के आश्रितों को संबल देने के लिए अनुकंपा नियुक्ति नियमों में पुत्रवधू को भी पात्र मानने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।
कार्यक्रम में गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर सांसद मदन राठौड़, विधायक गोपाल शर्मा, राजस्थान पेंशनर समाज के अध्यक्ष शंकर सिंह मनोहर सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित रहे।