पूर्णिमा व्रत एवं श्री दत्त महाप्रभु जयंती पर विशेष
│रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा पुष्कर
4 दिसंबर 2025 को पुष्कर में होगा पुण्य और परंपरा का महापर्व
पुष्कर/ अजमेर।मार्गशीर्ष मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा इस वर्ष कई दुर्लभ और महत्वपूर्ण संयोगों के साथ आ रही है। ज्योतिष गणना के अनुसार 4 दिसंबर 2025, गुरुवार को पूर्णिमा रहेगी। इस बार की पूर्णिमा पर श्री दत्त महाप्रभु जयंती, नौसेना दिवस तथा जैन धर्म के 5वें तीर्थंकर संभावनाथ जी का जन्मोत्सव एक साथ मनाए जाएंगे, जिससे यह पर्व अत्यंत पावन बन गया है।
■ तिथि एवं विशेष योग
3 दिसंबर, बुधवार को दोपहर 12:26 बजे चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ होगा।
4 दिसंबर, गुरुवार को सुबह 8:38 बजे पूर्णिमा तिथि का आगमन होगा।
पंचांग अनुसार इस बार पूर्णिमा क्षय योग बन रहा है, जो अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना गया है।
पंडित कैलाश नाथ दाधीच बताते हैं कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा को श्री दत्तात्रेय का अवतरण हुआ था, इसलिए यह दिन दत्त भक्तों के लिए विशेष पुण्यप्रद है। भक्त व्रत, पूजन और मंत्र-जप कर दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
■ पुष्कर तीर्थ का महत्व
पूर्णिमा पर नदियों, समुद्र और तीर्थों में स्नान की परंपरा है, लेकिन ब्रह्मा सरोवर पुष्करराज में स्नान को सर्वोत्तम माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश पुष्कर में स्थित रहते हैं।
भक्तजन इस दिन—
- पवित्र स्नान
- पुष्कर परिक्रमा
- हवन
- दान-पुण्य
- पितरों के नाम तर्पण
जैसे शुभ कर्म करते हैं। इस दिन किए गए दान को अक्षय फल प्रदान करने वाला माना गया है।
■ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता
दाधीच परंपरा के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा को गुरु-तत्त्व की प्रधानता प्राप्त होती है। श्री दत्त महाप्रभु को त्रिदेव स्वरूप—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—का संयुक्त अवतार माना जाता है।
जैन समाज इस दिन संभावनाथ जी के जन्मोत्सव को श्रद्धापूर्वक मनाता है।
साथ ही, देश इस दिन नौसेना दिवस पर समुद्री सीमा की सुरक्षा में योगदान देने वाले अमर वीरों को याद करेगा।
■ वर्ष 2025 की अंतिम पूर्णिमा
यह पूर्णिमा वर्ष 2025 की अंतिम पूर्णिमा होगी।
अगली पूर्णिमा 3 जनवरी 2026 को माघ मास में आएगी, जो मलमास होने के कारण और भी विशिष्ट मानी जाएगा।