पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में ‘युवा संवाद’: मुकुल कानिटकर ने कहा— “कंफर्ट जोन तोड़ना ही असली वीरता, खुद से अनुस्पर्धा कर बनें महान”
जयपुर | 27 जनवरी, 2026
| योगेश शर्मा
पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में मंगलवार को आयोजित विशेष युवा संवाद ‘जागो वीर-शक्ति पहचानो’ में देश के प्रख्यात लेखक, विचारक और प्रेरक मुकुल कानिटकर ने छात्र-छात्राओं को जीवन की नई दिशा दिखाई। इस सत्र में राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने भी युवाओं के साथ अपने अनुभव साझा किए और उन्हें राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया।
लक्ष्य की परिभाषा: मुश्किल को बनाएं पहली प्राथमिकता
सत्र को संबोधित करते हुए मुकुल कानिटकर ने युवाओं से कहा कि यदि जीवन में कुछ बड़ा हासिल करना है, तो अपने लक्ष्य को स्वयं की वर्तमान क्षमता से बड़ा रखें। उन्होंने सफलता का मंत्र देते हुए कहा:
- प्रथम प्रयास और मुश्किल लक्ष्य: सबसे पहले उस कार्य को हाथ में लें जो आपको सबसे कठिन लगता है। एक बार कठिन लक्ष्य पूरा होने पर नए रास्तों के द्वार खुल जाते हैं।
- कंफर्ट जोन और वीरता: वीरता शारीरिक बल से अधिक एक ‘एटीट्यूड’ (नजरिया) है। जो युवा अपने कंफर्ट जोन को तोड़कर खुद को चुनौती देता है, वही वास्तव में वीर है।
प्रतिस्पर्धा नहीं, ‘अनुस्पर्धा’ पर जोर
अपनी चर्चित पुस्तक ‘परीक्षा दें हंसते-हंसते’ का जिक्र करते हुए कानिटकर ने एक गहरा जीवन दर्शन साझा किया। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा (Competition) हमेशा दूसरों के साथ होती है, जिसमें व्यक्ति दूसरों को पीछे छोड़ने की सोचता है। इसके विपरीत, अनुस्पर्धा का अर्थ है स्वयं के साथ मुकाबला करना। यदि आप हर दिन पिछले दिन से बेहतर बनने की कोशिश करेंगे, तो आप निश्चित रूप से महानता को प्राप्त करेंगे।
राष्ट्र प्रथम: केवल खुद के लिए नहीं, देश के लिए पढ़ें
कानिटकर ने छात्रों का आह्वान किया कि वे शिक्षा को केवल व्यक्तिगत स्वार्थ से न जोड़ें।
- कृष्ण का उदाहरण: उन्होंने समझाया कि कृष्ण ने समाज के कल्याण के लिए रचना की, जबकि हिटलर और शकुनी जैसे पात्रों ने केवल अपने स्वार्थ के लिए लक्ष्य तय किए।
- विश्व गुरु भारत: उन्होंने कहा कि 21 जून 2015 को जब 193 देशों ने एक साथ योग किया, तब भारत ने विश्व गुरु की अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया था। युवाओं को स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी के आदर्शों को जीवन में उतारना चाहिए।
कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़: “युवा वर्तमान की सबसे बड़ी शक्ति”
कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने युवाओं के जोश की सराहना करते हुए कहा कि युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे प्रभावी शक्ति हैं। उन्होंने छात्रों को निरंतर ‘वैल्यू एडिशन’ (मूल्य संवर्धन) करने की सलाह दी, ताकि वे न केवल स्वयं का बल्कि राष्ट्र का स्तर भी ऊंचा उठा सकें।
समारोह की झलकियाँ
- स्वागत: कार्यक्रम के प्रारंभ में शासन सचिव (युवा मामले एवं खेल विभाग) डॉ. नीरज के. पवन (IAS) और पूर्णिमा ग्रुप के चेयरमैन शशिकांत सिंघी ने अतिथियों का स्वागत किया।
- प्रश्नोत्तर सत्र: छात्रों ने अपनी जिज्ञासाएं रखीं, जिनका कानिटकर ने उदाहरणों के साथ समाधान किया।
- धन्यवाद ज्ञापन: कार्यक्रम का समापन पूर्णिमा ग्रुप के डायरेक्टर राहुल सिंघी द्वारा धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ हुआ।
