पूर्णिमा इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट में स्ट्रीट फूड फेस्टिवल की धूम: स्टूडेंट्स ने चखाया स्वाद, सीखा टीमवर्क और मैनेजमेंट का हुनर
| योगेश शर्मा
जयपुर। पूर्णिमा इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (PIHM) के प्रांगण में दो दिवसीय ‘स्ट्रीट फूड फेस्टिवल’ का रंगारंग आयोजन किया गया। इस उत्सव के माध्यम से होटल मैनेजमेंट के विद्यार्थियों को न केवल अपनी पाक कला (Culinary Skills) दिखाने का मौका मिला, बल्कि उन्होंने वास्तविक दुनिया के व्यावसायिक अनुभवों को भी करीब से महसूस किया।
शेफ शोभित गुर्जर ने किया उद्घाटन
फेस्टिवल का विधिवत शुभारंभ होटल ओबेरॉय राजविलास के शेफ शोभित गुर्जर ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। उन्होंने पूर्णिमा ग्रुप के डायरेक्टर राहुल सिंघी, पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट डॉ. सुरेश चंद पाढ़ी और पीआईएचएम के डायरेक्टर सुनील भार्गव के साथ फीता काटकर स्टॉल्स का अवलोकन किया।
मेन्यू में दिखी विविधता: देसी तड़के से लेकर कॉन्टिनेंटल स्वाद तक
स्टूडेंट्स द्वारा तैयार किए गए व्यंजनों की लंबी फेहरिस्त ने अतिथियों और आगंतुकों का दिल जीत लिया। फेस्टिवल के आकर्षण रहे:
- स्नैक्स और चाट: चीज सिगार रोल, वड़ा पाव, हॉट डॉग, चाइनीज भेल, फ्राइड मोमोज, आलू टिक्की छोले और पाव भाजी।
- मेन कोर्स: चिली चिकन, बटर चिकन विद कुलचा और छोले भटूरे।
- बेकरी और डेजर्ट: स्विस रोल, क्रीम रोल, पाइनएप्पल पेस्ट्री, चॉकलेट ब्राउनी, चॉकलेट डोनट, बनाना ब्रेड, लेमन चीज केक और प्लम केक।
- मॉकटेल्स: ड्रिंक्स में ‘फायर एंड आइस’ एवं ‘ब्लू लैगून’ विशेष रूप से चर्चा में रहे।
सीखने का अनूठा मंच: ‘इंडस्ट्री रेडी’ बन रहे छात्र
इस आयोजन का मूल उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि शैक्षणिक विकास था।
- व्यावहारिक अनुभव: प्रथम वर्ष के छात्रों ने अपने सीनियर्स और फैकल्टी के मार्गदर्शन में व्यंजन तैयार करने से लेकर स्टॉल संभालने तक की जिम्मेदारी निभाई।
- मैनेजमेंट स्किल्स: छात्रों ने लाइव कस्टमर इंटरैक्शन, प्रोडक्ट प्रेजेंटेशन, लागत निर्धारण (Costing), टीमवर्क और सेल्स मैनेजमेंट के गुर सीखे।
दिग्गजों के विचार
मुख्य अतिथि शेफ शोभित गुर्जर ने छात्रों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को इंडस्ट्री के वास्तविक और चुनौतीपूर्ण वातावरण के लिए मानसिक रूप से तैयार करते हैं। वहीं, डायरेक्टर सुनील भार्गव ने बताया कि पूर्णिमा ग्रुप का सदैव प्रयास रहता है कि स्टूडेंट्स को केवल किताबी ज्ञान न देकर उन्हें व्यावहारिक रूप से ‘इंडस्ट्री-रेडी’ बनाया जाए।
