पुष्कर: सावित्री माता रोपवे में फंसे दो श्रद्धालु, एक घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित निकाला; जानें क्या था पूरा माजरा

पुष्कर/अजमेर (हरिप्रसाद शर्मा)। तीर्थ नगरी पुष्कर में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब सूचना मिली कि सावित्री माता मंदिर की पहाड़ी पर जाने वाला रोपवे बीच रास्ते में अटक गया है और उसमें दो श्रद्धालु फंसे हुए हैं। सूचना मिलते ही प्रशासन और राहत टीमें सक्रिय हो गईं। करीब एक घंटे तक चले हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों व्यक्तियों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। हालांकि, बाद में खुलासा हुआ कि यह कोई वास्तविक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासन द्वारा आयोजित एक ‘मॉक ड्रिल’ थी।

आपातकालीन तैयारियों की हुई अग्निपरीक्षा

​जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार आयोजित इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य रोपवे जैसी संवेदनशील जगहों पर आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और तैयारियों को जांचना था।

​जैसे ही रोपवे में श्रद्धालुओं के फंसने की ‘काल्पनिक’ सूचना प्रसारित की गई, मौके पर NDRF, उपखंड प्रशासन, मेडिकल टीम, फायर ब्रिगेड और रोपवे प्रबंधन की टीमें तुरंत पहुंच गईं। भारी भीड़ और ऊँचाई के बीच संयुक्त रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया।

NDRF ने दिखाया बचाव कौशल

​अभियान के दौरान NDRF की टीम ने अत्याधुनिक उपकरणों और रस्सियों के सहारे ट्रॉली तक पहुँचने और उसमें फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।

  • रेस्क्यू समय: करीब 60 मिनट।
  • शामिल टीमें: NDRF, 108 एम्बुलेंस सेवा, दमकल विभाग और पुष्कर मेडिकल टीम।

अधिकारियों का पक्ष: क्यों जरूरी है मॉक ड्रिल?

उपखंड अधिकारी (SDO) गुरुप्रसाद बर ने बताया कि मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न विभागों ने संयुक्त रूप से सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। उन्होंने कहा कि समय-समय पर ऐसे अभ्यास से तकनीकी खामियों और रिस्पांस टाइम को सुधारने में मदद मिलती है।

NDRF के सहायक कमांडर प्रवीण कुमार ने जानकारी दी कि:

​”मॉक ड्रिल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यदि तकनीकी खराबी के कारण रोपवे बीच रास्ते में रुक जाए, तो किस तरह यात्रियों को बिना किसी नुकसान के नीचे उतारा जाए। आपदा की स्थिति में प्रभावी कार्रवाई के लिए यह अभ्यास अनिवार्य है।”

 

मौके पर मौजूद रहे आला अधिकारी

​इस सफल मॉक ड्रिल के दौरान मेडिकल कमांडेंट सुधीर कुमार, पोखरमपाल, अजय सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। पूरे अभ्यास के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया गया और बचाव के व्यावहारिक पहलुओं का प्रदर्शन किया गया।

​इस ड्रिल के सफल समापन के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली और रोपवे प्रबंधन को सुरक्षा संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

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