पुष्कर सरोवर में ऑक्सीजन की कमी से मछलियों की मौत, तीर्थ पुरोहित संघ ने उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 28,2025
(हरिप्रसाद शर्मा, पुष्कर/अजमेर) — पुष्कर सरोवर, जिसे धर्म और आस्था का प्रतीक माना जाता है, इन दिनों गंभीर पर्यावरणीय संकट से गुजर रहा है। सरोवर के जल में ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मछलियों की मौत हो रही है, जिससे न केवल जल प्रदूषित हो रहा है बल्कि धार्मिक आस्था भी आहत हो रही है। इस समस्या को लेकर शुक्रवार को श्री तीर्थ पुरोहित संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा और त्वरित समाधान की मांग की।
ऑक्सीजन की कमी से बिगड़ा सरोवर का पारिस्थितिकी तंत्र
गर्मी के दिनों में जल का तापमान बढ़ने के साथ-साथ सरोवर में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से घट रही है। इसका प्रत्यक्ष असर वहां रहने वाले जलजीवों पर पड़ रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मछलियों के मृत शरीर सरोवर के किनारों पर दिखाई दे रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है।
तीर्थ पुरोहित संघ ने उठाई यह प्रमुख मांगें:
श्री तीर्थ पुरोहित संघ के सचिव कैलाश पाराशर ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से निम्नलिखित महत्वपूर्ण मांगें रखीं:
- सरोवर में सभी ट्यूबवेल तत्काल चालू किए जाएं, ताकि जल में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य हो सके।
- नगर परिषद कार्यालय के नीचे लगे ऑक्सीजन प्लांट को शीघ्र शुरू किया जाए, जिससे जल में कृत्रिम रूप से ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा सके।
- बद्री घाट पर बीसलपुर पाइपलाइन से 24 घंटे जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, जिससे पानी का प्रवाह बना रहे और दूषित जल का स्तर कम हो।
श्रद्धालुओं में रोष, प्रशासन पर त्वरित कार्रवाई का दबाव
स्थानीय श्रद्धालुओं, तीर्थ पुरोहितों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि समय रहते कार्रवाई की जाए, अन्यथा यह स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
तीर्थ नगरी पुष्कर, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पवित्र सरोवर में स्नान और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं, वहां इस प्रकार की पर्यावरणीय उपेक्षा धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टियों से चिंताजनक है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा
ज्ञापन मिलने के बाद उपखंड अधिकारी ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक किसी ठोस कदम की जानकारी नहीं मिली है। उम्मीद की जा रही है कि निकट भविष्य में प्रशासन इन मांगों पर अमल करेगा ताकि सरोवर की पवित्रता और पारिस्थितिकी संतुलन दोनों को बचाया जा सके।