पुष्कर: श्री रमा वैकुंठ नए रंगजी मंदिर से निकली बसंत की भव्य शाही सवारी, गुलाल और केसर की खुशबू से महकी तीर्थ नगरी
| हरि प्रसाद शर्मा
पुष्कर (अजमेर)। तीर्थराज पुष्कर में आस्था और उत्साह के अनूठे संगम के साथ 11 दिवसीय सालाना ब्रह्मोत्सव के अंतर्गत गुरुवार शाम को भगवान वैकुंठनाथ की भव्य ‘बसंत की बड़ी सवारी’ शाही अंदाज में निकाली गई। उत्सव के दौरान समूची पुष्कर घाटी भक्ति के रंगों और केसर की खुशबू से सराबोर नजर आई।
शाही ठाट-बाट के साथ नगर भ्रमण
श्री रमा वैकुंठ नए रंगजी मंदिर से शुरू हुई यह सवारी साल भर निकलने वाली पालकियों में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण मानी जाती है। मंदिर व्यवस्थापक सत्यनारायण रामावत ने बताया कि गाजे-बाजे और लवाजमे के साथ शाम को मंदिर परिसर से भगवान वैकुंठनाथ नगर भ्रमण पर निकले। सवारी में शामिल मनमोहक और आकर्षक झांकियां श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं, जिन्हें देखने के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भारी संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा।
श्रद्धालुओं के साथ खेली केसर-अबीर की होली
सवारी के दौरान भक्ति का अद्भुत नजारा तब देखने को मिला जब स्वयं भगवान वैकुंठनाथ ने पिचकारी से श्रद्धालुओं पर केसर और अबीर की वर्षा की। भक्त अपने आराध्य के साथ होली खेलकर निहाल हो गए। पूरे मार्ग में ‘जय वैकुंठनाथ’ के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा।
जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत
सवारी के स्वागत में पुष्कर वासियों ने पलक-पावड़े बिछा दिए। मुख्य मार्गों पर श्रद्धालुओं ने अपने प्रतिष्ठानों और घरों के सामने साफ-सफाई कर आकर्षक रंगोलियां सजाईं। जैसे ही ठाकुर जी की सवारी द्वार पर पहुंची, भक्तों ने आरती उतारकर भोग लगाया और पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।
इन मार्गों से गुजरी सवारी
परंपरागत मार्ग के अनुसार यह शाही सवारी:
- वराह घाट चौक
- बद्री घाट
- गऊघाट
- मालनियों का चौक
- होली का चौक
इन प्रमुख रास्तों से होते हुए और श्रद्धालुओं को दर्शन देते हुए सवारी देर रात करीब 11 बजे पुनः मंदिर परिसर पहुंची, जहां महाआरती के साथ आयोजन का समापन हुआ।
