रिपोर्ट: हरिप्रसाद शर्मा, पुष्कर, अजमेर
पुष्कर (अजमेर)। तीर्थों के गुरु और पवित्र धार्मिक नगरी पुष्कर में श्री राधे-राधे सत्संग मंडल, इंदौर के तत्वावधान में भव्य श्रीमद्भागवत कथा का मंगलमय शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन व्यासपीठ पर विराजमान महामण्डलेश्वर आचार्य स्वामी भास्करानन्द महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से भक्तों को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।

कथा का मुख्य संदेश: हृदय में परमात्मा ही श्रेष्ठता की पहचान
महाराजश्री ने कथा के आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात कृष्ण का स्वरूप है। उन्होंने जोर देकर कहा:
”भागवत सुनने मात्र से परमात्मा की प्राप्ति संभव है। इस संसार में वही व्यक्ति श्रेष्ठ है, जिसके हृदय में परमात्मा का वास है।”
स्वामीजी ने जीवन दर्शन को समझाते हुए एक गूढ़ बात कही कि सच्चा साधक वही है जो ‘यहाँ (संसार) रहते हुए भी वहाँ (परमात्मा) का है’। उन्होंने ज्ञान, भक्ति और वैराग्य के आपसी संबंध को स्पष्ट करते हुए भक्तों को आत्मिक शांति का मार्ग दिखाया।
23 दोषों से मुक्ति का मार्ग
कथा के दौरान महाराज ने मानव स्वभाव में व्याप्त 23 प्रकार के दोषों की व्याख्या की। उन्होंने भक्तों को आश्वस्त किया कि भागवत की महिमा इतनी अपरंपार है कि इन दोषों से ग्रसित व्यक्ति भी यदि श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण करता है, तो वह समस्त विकारों से मुक्त होकर मोक्ष का अधिकारी बन जाता है।
तीर्थराज पुष्कर की महिमा
पुष्कर की पावन धरा का वर्णन करते हुए स्वामी भास्करानन्द ने कहा कि:
- पुष्कर तीर्थों का गुरु है: यहाँ की रज का स्पर्श ही कल्याणकारी है।
- तीर्थों का महत्व: उन्होंने बताया कि सभी स्थान तीर्थ हो सकते हैं, लेकिन पुष्कर की प्रधानता अद्वितीय है क्योंकि यहाँ साक्षात ब्रह्मा जी का वास और प्रकृति का अनुपम संगम है।
भक्तिमय माहौल में झूम उठे श्रद्धालु
इंदौर से आए सत्संग मंडल और स्थानीय भक्तों की उपस्थिति से कथा स्थल भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। भजनों की मधुर धुनों और ‘राधे-राधे’ के जयघोष से संपूर्ण वातावरण गुंजायमान हो उठा। प्रथम दिन की आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।