पुष्कर मेले में देसी जोश का जलवा — स्थानीय टीम ने विदेशी सैलानियों को रोमांचक कबड्डी मुकाबले में दी मात
खेल, संस्कृति और उत्सव का अद्भुत संगम — दर्शकों ने किया जोशीला स्वागत, विदेशी मेहमान बोले “यह अनुभव अविस्मरणीय रहेगा”
(हरिप्रसाद शर्मा) पुष्कर/अजमेर।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुष्कर मेला 2025 में शनिवार को देसी खेलों और विदेशी जोश का अनोखा संगम देखने को मिला। मेला मैदान में आयोजित कबड्डी मुकाबले ने दर्शकों को रोमांच से भर दिया। यह मुकाबला स्थानीय खिलाड़ियों और विदेशी सैलानियों के बीच खेला गया, जिसमें देसी टीम ने विदेशी टीम को शानदार अंदाज में मात दी। पूरे मैदान में जयकारों और तालियों की गूंज से उत्सव का माहौल बन गया।

🏋️♂️ विदेशी टीम की मजबूत शुरुआत, फिर बदला खेल का रुख
मुकाबले की शुरुआत में विदेशी खिलाड़ियों ने बेहतरीन फुर्ती और रणनीति दिखाते हुए बढ़त बना ली थी। कुछ देर तक ऐसा लगा मानो विदेशी टीम जीत की ओर बढ़ रही हो, लेकिन स्थानीय खिलाड़ियों ने अपने अनुभव और दमखम से खेल का पासा पलट दिया।
अंतिम दौर में स्थानीय खिलाड़ियों ने शानदार रेड और डिफेंस दिखाते हुए विदेशी टीम को पछाड़ दिया और मैच को अपने नाम किया। दर्शकों ने हर अंक पर तालियों की गड़गड़ाहट से खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया।
🎉 दर्शकों में उत्साह, विदेशी सैलानियों ने कहा – “भारत में खेलना अविस्मरणीय अनुभव”
मैदान में भारी भीड़ जुटी रही। स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों ने इस अनोखे मुकाबले का भरपूर आनंद लिया।
विदेशी खिलाड़ियों ने कहा कि “यह अनुभव उनके लिए यादगार रहेगा। भारतीय संस्कृति और पारंपरिक खेलों में भाग लेकर हमने बहुत कुछ सीखा है।”
उन्होंने मेले के आयोजन और भारतीय अतिथ्य भाव की सराहना करते हुए कहा कि “पुष्कर मेला वास्तव में संस्कृति और मैत्री का संगम है।”
🏅 खिलाड़ियों का हुआ सम्मान, दिया गया एकता का संदेश
खेल के समापन पर दोनों टीमों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
यह प्रतियोगिता पशुपालन विभाग और पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी।
अधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल खेल भावना को मजबूत करते हैं, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के बीच सौहार्द और एकता का संदेश भी देते हैं।
🌍 पुष्कर मेला बना वैश्विक मेलजोल का प्रतीक
डॉ. कुलदीप अग्रवाल (पशुपालन विभाग) ने बताया कि इस तरह के आयोजन से देसी खेलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
उन्होंने कहा — “कबड्डी जैसे खेल भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़े हैं। जब विदेशी खिलाड़ी इसमें भाग लेते हैं, तो यह सिर्फ खेल नहीं, बल्कि संस्कृति का आदान-प्रदान बन जाता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पुष्कर मेला आज केवल धार्मिक या पशु व्यापार का आयोजन नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर सांस्कृतिक संवाद और खेल भावना का मंच बन चुका है।
🕊️ मेले में संस्कृति, खेल और मित्रता का उत्सव
विदेशी और स्थानीय खिलाड़ियों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाकर दोस्ती और सहयोग का संदेश दिया।
खेल के बाद दर्शकों ने दोनों टीमों पर फूलों की वर्षा की और उत्साह से “जय पुष्कर” और “भारत माता की जय” के नारे लगाए।
इस अवसर पर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, मेला समिति सदस्य और बड़ी संख्या में पर्यटक मौजूद रहे।
पुष्कर मेला 2025 लगातार यह साबित कर रहा है कि राजस्थान की धरती पर केवल परंपरा ही नहीं, बल्कि वैश्विक एकता और सांस्कृतिक सौहार्द की भी नई कहानी लिखी जा रही है।