हरिप्रसाद शर्मा
पुष्कर/अजमेर। तीर्थराज पुष्कर की पावन धरा इन दिनों एक ऐसी कठिन आध्यात्मिक साधना की साक्षी बन रही है, जिसे देख हर कोई हतप्रभ है। राजस्थान की भीषण गर्मी के बीच, जहाँ पारा आसमान छू रहा है, वहीं एक रूसी मूल की साध्वी धधकती आग के बीच बैठकर विश्व कल्याण की कामना कर रही हैं। छोटी बस्ती स्थित श्मशान स्थल में अघोरी सीताराम बाबा के आश्रम पर नाथ संप्रदाय की प्राचीन “नौ धूणी अग्नि तपस्या” जारी है।
विदेशी धरती पर जन्म, भारत में पाई अध्यात्म की राह
इस कठिन साधना का केंद्र बनी हैं योगिनी अन्नपूर्णा नाथ। तत्कालीन सोवियत संघ में जन्मी और कजाकिस्तान में पली-बढ़ी अन्नपूर्णा करीब 17 वर्ष पहले भारत आई थीं। भारतीय संस्कृति और योग से प्रभावित होकर उन्होंने 10 वर्ष पूर्व नाथ संप्रदाय से दीक्षा ली और सांसारिक मोह त्यागकर साध्वी बन गईं। वर्तमान में वे रूसी नागरिकता पर भारत में रहकर निरंतर साधना कर रही हैं।

साधना का स्वरूप: 3 घंटे की कठिन परीक्षा
यह तपस्या 3 मई से प्रारंभ हुई है जो 25 मई तक चलेगी। साधना का क्रम बेहद चुनौतीपूर्ण है:
- समय: प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 2:15 बजे तक (जब सूर्य का ताप चरम पर होता है)।
- विधि: साध्वी अन्नपूर्णा नाथ और उनके गुरु बाल योगी दीपक नाथ शरीर पर गौमय भस्म का लेप कर नौ धधकती धूणियों के बीच बैठते हैं।
- अग्नि का विस्तार: शुरुआत 21 गोबर के कंडों से हुई थी, जो अंतिम दिन बढ़कर 108 कंडे तक पहुँच जाएगी। वर्तमान में प्रत्येक धूणी पर लगभग 40 कंडे जलाए जा रहे हैं।
विश्व शांति और जनकल्याण का उद्देश्य
योगिनी अन्नपूर्णा नाथ का मानना है कि सिद्धि स्वयं तपस्या का परिणाम है। उन्होंने कहा, “यह साधना केवल शरीर को कष्ट देना नहीं है, बल्कि आत्मशक्ति को जागृत करने का मार्ग है। संतों की तपस्या केवल स्वयं के मोक्ष के लिए नहीं, बल्कि समाज और विश्व के कल्याण के लिए होती है।”
वहीँ, गुरु बाल योगी दीपक नाथ ने बताया कि यह नाथ संप्रदाय की सदियों पुरानी परंपरा है। उन्होंने कहा कि यह साधना एक यज्ञ के समान है, जिसका उद्देश्य नकारात्मक ऊर्जा का नाश और विश्व में शांति स्थापित करना है।
शक्तिपीठों की यात्रा और कठिन संकल्प
अन्नपूर्णा नाथ केवल अग्नि तप ही नहीं, बल्कि 52 शक्तिपीठों की यात्रा पर भी हैं, जिनमें से वे 35 शक्तिपीठों के दर्शन कर चुकी हैं। इससे पूर्व उन्होंने पुष्कर सरोवर के किनारे लगातार 9 दिनों तक खड़े रहकर भी तपस्या की थी, जिसने काफी चर्चा बटोरी थी।
25 मई को होगी पूर्णाहुति
पुष्कर का यह श्मशान स्थल वर्तमान में शिव मंत्रों और हवन की सुगंध से गुंजायमान है। इस कठिन अग्नि तपस्या का समापन 25 मई को होगा, जिसमें विशाल हवन, पूर्णाहुति और संत भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अद्भुत दृश्य को देखने और साधकों का आशीर्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुष्कर पहुँच रहे हैं।