पुष्कर में धूमधाम से मनाई गई महर्षि दधीचि जयंती
31 अगस्त। रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा पुष्कर।संपादन नरेश गुनानी टेलीग्राफ टाइम्स
पुष्कर/अजमेर। धार्मिक नगरी पुष्कर में रविवार को अखिल भारत वर्षीय दाधीच आश्रम समिति के तत्वावधान में महर्षि दधीचि जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 8 बजे वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हुई, जिसमें भगवान शंकर और महर्षि दधीचि का पुष्कर सरोवर के पवित्र जल और पंचामृत से अभिषेक पूजन किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध नगाड़ा वादक दल ने झालर, शंख और मंजीरे की गूंज के साथ भक्ति संगीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

वैदिक अनुष्ठान और पूजन-अर्चना
राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित देवीलाल शास्त्री और संयोजक कैलाश नाथ दाधीच ने अभिषेक एवं महाआरती का नेतृत्व किया। विद्वान पंडित नथमल शास्त्री (पूर्व प्रधानाध्यापक, भीमसर-चुरू) ने श्रीमद्भागवत कथा के सात दिवसीय मूल पाठ का विश्राम किया। उन्होंने अपने प्रवचन में बताया कि महर्षि दधीचि की तपस्थली पुष्कर रही है, जहां सतयुग में उन्होंने भगवान महादेव से मंत्र विद्या की दीक्षा लेकर सौ वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर श्री राधा रानी ने उन्हें दर्शन दिए और गोलोक धाम प्राप्ति का वरदान प्रदान किया। इसी कारण दधीचि जन्मोत्सव के साथ राधाष्टमी पर्व भी भव्य रूप से मनाया जाता है।
समाज की भागीदारी
अनुष्ठान के दौरान पंडित घीसालाल पाटोदिया, सुशील दाधीच, प्रेम सागर शर्मा, कमल नयन दाधीच और रतनलाल शास्त्री सहित अनेक विद्वानों ने पूजन-अर्चना कर महाआरती की। इसके उपरांत प्रसाद वितरण किया गया।
सम्मान समारोह और सामूहिक प्रसादी
कार्यक्रम की श्रृंखला में दोपहर 4 बजे समाज के प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान किया जाएगा, जिन्होंने बोर्ड परीक्षा में 80% से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। इसके अलावा समाज की विशिष्ट प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया जाएगा।
शाम को दधीच समाज बंधुओं के लिए सामूहिक महाप्रसादी का आयोजन रखा गया है।
आयोजन में सक्रिय सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में सत्यनारायण तिवाड़ी, पवन भाभड़ा, अंजु व्यास, कुलदीप दाधीच, सत्यनारायण पाटोदिया, जयकिशन खटोड, धनराज दाधीच, गौरव दाधीच, नीरज मिश्रा और गौतम डोलिया सहित अनेक समाजसेवियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।